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रायशुमारी करने आए पर्यवेक्षकों के सामने सिंधिया-दिग्विजय गुट के कांग्रेस नेता भिड़े

3 वर्ष पहले
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कांग्रेस के संगठन चुनाव के लिए रायशुमारी करने आए पर्यवेक्षकों के सामने शनिवार को कांग्रेसी आपस में भिड़ गए। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ लढ़ा के दफ्तर पर मंडलम के लिए पदाधिकारी चुनने को लेकर विवाद हुआ। दरअसल, यहां पर सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह गुट के नेता आमने-सामने आ गए। इस बीच माहौल गरमा गया और कुछ नेताओं ने पदाधिकारियों के सामने ही गालीगलौच कर दी। नौबत मारपीट तक आ गई। इसके बाद शिकायत मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। बताया जा रहा है कि कार्यकर्ताओं के बीच बड़ा पद पाने को लेकर विवाद हुआ।

दूसरा गुट पहुंचा तो उप्पल बोले- तुम जैसों की वजह से ही सिंधिया जी सीएम प्रोजेक्ट नहीं हो पा रहे: शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ लढ़ा के घर पर दक्षिण ब्लॉक की बैठक चल रही थी। इस बैठक में बतौर आब्जर्वर ग्वालियर के शहर कांग्रेस अध्यक्ष मोहन सिंह राठौर, दीवान हरसी और हसमत सिद्दीकी शामिल हुए। इनको उत्तर ब्लॉक के लिए पदाधिकारियों का चयन करना था। लेकिन इससे पहले कि ये चयन कर पाते वहां पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष राकेश गुप्ता और कांग्रेस नेता इब्राहिम खान करीब 100 हम्मालों को लेकर पहुंच गए। वहां पहले से आब्जर्वरों के साथ कांग्रेस के प्रवक्ता हरवीर सिंह रघुवंशी, पोहरी के पूर्व विधायक हरीवल्लभ शुक्ला, पूर्व नपा उपाध्यक्ष पदम काका और कांग्रेस के उप्पल खान अौर बासित अली मौजूद थे। बैठक में जैसे ही उत्तर के पदाधिकारियों को दक्षिण के लोगों ने देखा तो सिंधिया समर्थक उप्पल खान ने कहना शुरु कर दिया कि हमारे ज्योतिरादित्य सिंधिया इसलिए मप्र में मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं हो पा रहे हैं, क्योंकि तुम जैसे लोग ओछी राजनीति करते हो। इतना सुनते ही बासित अली ने इन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन किसी ने किसी की नहीं मानी।

इस बीच पूर्व नपाध्यक्ष पदम काका और जिला कांग्रेस प्रवक्ता हरवीर रघुवंशी अापस में भिड़ गए। इन दोनों के बीच जमकर गाली गलौज हुई और नौबत मारपीट तक आ गई। विवाद बढ़ता देख पर्यवेक्षक उठकर चले गए। पूर्व विधायक हरी वल्लभ शुक्ला भी चुपचाप वहां से खिसक लिए। इसके बाद कांग्रेस के नेता राजेंद्र शर्मा और उप्पल खान भिड़ पड़े। पूरे समय सिंधिया गुट और दिग्विजय सिंह गुट के नेताओं के बीच विवाद हुआ।

बैठक के दौरान पूर्व पार्षद इरशाद पठान से उलझता कांग्रेसी, झगड़े के बाद मामले को शांत करने में लगे नेता।

पढ़िए... कौन किससे क्यूं भिड़ा

बैठक में कांग्रेस के पार्षद बबलू और पूर्व पार्षद इरशाद पठान पहुंच गए। बबलू को देखकर इरशाद ने कहा कि तुम लोगों की पैरवी मैं तो कर रहा हूं। फिर तुम यहां कैसे आ गए। इस पर बबलू भड़क गए और उन्होंने कहा कि तुम कौन होते हो हमारी पैरवी करने वाले। इरशाद यहां जोर- जोर से चिल्ला रहे थे कि महाराज के यहां महाराज से पहले उनके पीए सेट करने पड़ते हैं।

कांग्रेस नेता उप्पल और राजेंद्र शर्मा के बीच विवाद हो गया। जैसे ही उत्तर की बैठक में दक्षिण के लोग पहुंचे तो उन्हें देखकर उप्पल ने कहा कि इसी वजह से सिंधिया मुख्यमंत्री के लिए प्रोजेक्ट नहीं हो पा रहे हैं। ये दिग्विजय सिंह के लोग ऐसा नहीं होने दे रहे हैं। इस बात पर राजेंद्र शर्मा भी भड़क गए और दोनों में कहासुनी हो गई।

कांग्रेस प्रवक्ता हरवीर रघुवंशी और नपा के पूर्व उपाध्यक्ष पदम काका के बीच जमकर लड़ाई हुई। दोनों के बीच गालीगलौच होने की खबरें हैं। ये दोनों भी पदाधिकारियों के चयन को लेकर भिड़ गए।

जब मामला उजागर हुआ तो छुपाने में लग गए नेता

पदम काका और मेरे बीच थोड़ा सा विवाद हुआ था लेकिन वह बाद में बोल पड़े कि मैंने तो हंसी- हंसी में कह दिया। इसके अलावा मुझे नहीं मालूम क्या हुआ। हां इतना जरूर है कि कुछ लोग आपस में विवाद करने लगे। जिन्हें मैंने जाकर शांत करवा दिया। हरवीर रघुवंशी, प्रवक्ता, जिला कांग्रेस शिवपुरी

बात को बढ़ा चढ़ा कर प्रस्तुत किया जा रहा है। अभी मैं एक गमी मैं हूं। इससे ज्यादा कुछ भी नहीं कह सकता हूं। राजेंद्र शर्मा,कांग्रेस कार्यकर्ता

हमने राजेंद्र शर्मा जी से कहा कि आप उन लोगों का साथ न दें जो महाराज को मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट कराने में रोड़ा बन रहे हैं। हमने कहा कि इतनी भीड़ लेकर आने की जरूरत नहीं थी। यह होटल वनस्थली से कई लोगों को लेकर आ गए। हमने कहा कि इनकी जरूरत नहीं थी। इस पर वो भला बुरा कहने लगे। उप्पल खान, कांग्रेस कार्यकर्ता

संगठन चुनाव के बाद हर ब्लॉक में होंगे दो अध्यक्ष

कांग्रेस में संगठन के चुनाव हो रहे हैं। हर जोन को दो भागों में बांटा गया है। इसमें हर ब्लॉक में अब दो अध्यक्ष होंगे। इसके लिए आब्जर्वरों को बुलाया गया है। इसमें शहर में दो अध्यक्ष और जिले में 19 ब्लॉक अध्यक्ष चुने जाने हैं। इस लिहाज से हर विधानसभा में 3 से 4 अध्यक्षों को चुनना है। इसमें करीब 59 मंडलम चुने जाने हैं। 1 मंडलम को 25 से 30 मतदान केंद्रों का जिम्मा रहेगा। वहीं ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक प्रमुख को 70 से 80 मतदान केंद्रों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

हमारे संज्ञान में ऐसा कुछ नहीं आया। हमें तो पदाधिकारियों को चुनने की जिम्मेदारी मिली। अब चर्चा के दौरान थोड़ा बहुत वाद- विवाद तो होता ही है। लेकिन ऐसी कोई बात नहीं हुई जिसमें ये कहा जाए कि लोग आपस में लड़ बैठे। नाराज लोगों को शांत करा दिया था। मोहन सिंह राठौर, कांग्रेस आब्जर्वर

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