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जिनवाणी को आचरण में भी उतारें: आचार्य सुंदर सागर

3 वर्ष पहले
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शिवपुरी| जिनवाणी को पढ़ें ही नहीं उसे आचरण में भी उतारें। जब तक जिनवाणी की बातों पर चिंतन मनन कर तदनुरुप आचरण की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं होगी तब तक कैसे हम जिनधर्म को समझ सकेंगे। इसलिए सिर्फ जय जय नाथ परमगुरु हो यह अकेला न पढ़ें,यह भी समझें कि इसे पढ़कर हम किसकी वंदना कर रहे है। यह नसीहत जैनाचार्य सुंदर सागर महाराज ने धर्मसभा को चंद्र प्रभ जिनालय पर संबोधित कर मंगलवार सुबह कहे। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि जिनवाणी की आराधना के लिए आवश्यक है कि हम धर्म में वर्णित बातों को गंभीरता से पढ़ें । धर्मसभा से पूर्व पीली कोठी से आचार्य सुंदर सागर महाराज के साथ 18 पिच्छीकाओं का आगमन नगर में हुआ।

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