भारत देश की यह धरती केवल एक टुकड़ा मात्र नहीं है, यह पुण्य भूमि है जिसकी संस्कृति आदिकाल से सकल विश्व में विख्यात है जो सदा एकात्म मानववाद का भाव प्रदान करती है। यह भूमि भाव प्रधान भूमि है जिसका उदाहरण स्वामी विवेकानंद के शिकागो से आगमन के बाद भारत में आते ही मातृभूमि की मिट्टी में लोट जाते है यहां के पर्वत, नदी, महासागर, नगर, वेद-पुराण, ऋषि-मुनि , ज्ञान-विज्ञान आदि सदैव इसकी गाथा गाते हैं , इसलिए हमारा कर्तव्य बनता है कि हम इसकी रक्षा के लिए तैयार रहें । यह बात मुख्य वक्ता हितानंद शर्मा प्रांतीय संगठन मंत्री विद्या भारती ने विद्या भारती मध्य भारत प्रांत के शिवपुरी विभाग के नव चयनित आचार्यों के विकास वर्ग प्रशिक्षण वर्ग के दौरान कही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती ,भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया । मंचस्थ अतिथियों का परिचय वर्ग संयोजक राकेश समाधिया ने एवं अतिथि स्वागत वर्ग महाप्रबंधक एवं सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय के प्राचार्य जितेन्द्र परसाई ने तिलक लगाकर एवं श्रीफल भेंटकर किया।