करैरा में लंबे समय एक मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक देखा जा रहा था। समाजसेवी संगठन विकास क्रांति से जुड़े युवाओं ने इस युवक से बातचीत कर उसके बारे में जानने की कोशिश की। युवक ने जब हिंदी, अंग्रेजी सहित गोरखी भाषा में बातचीत की तो संगठन के युवक दंग रह गए। उसके घर-परिवार के बारे में पूछताछ शुरू कर परिजनों से मिलाने के प्रयास शुरू कर दिए। करीब दस दिन सोशल ग्रुप पर अभियान चलाकर युवाओं ने परिजनों से संपर्क साधा। मां और भाई रविवार को करैरा पहुंचे। तब पता चला कि युवक का नाम बबलू तिवारी है और उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले का रहने वाला है। मानसिक संतुलन बिगड़ने की वजह से करीब दो साल से बबलू लापता चल रहा था। अपने बेटे को फिर से देखकर मां अन्न बाई तिवारी की आंखों से आंसू झलक आए। बबलू को उसकी मां आैर भाई रवि तिवारी घर वापस ले गए हैं। अब उसका इलाज कराएंगे। मां अन्ना बाई ने बताया कि उसका बेटा दो साल पहले नौकरी की तलाश में उत्तर प्रदेश के नेपाल बॉर्डर के क्षेत्र में गया था। उसके बाद घर लौटकर नहीं आया। काफी तलाश करने के बाद भी उसे ढूंढ नहीं पा रहे थे। लेकिन करैरा के समाजसेवी युवाओं ने मिलकर उनके बेटे को मिलवाया है। इस बात का एहसान वह कभी नहीं भूल पाएंगी।
करैरा के समाजसेवी युवकों ने दस दिन तक सोशल ग्रुप पर अभियान चलाया, सूचना लगते ही माता-पिता लेने पहुंचे
गोंडा डीएम को पत्र भेजकर शुरू की युवाओं ने मुहिम
विकास क्रांति के विनय मिश्रा, सुमित तिवारी, चंद्रभान राजपूत, विजय नरवारी हिमांशु पाठक आदि ने बबलू से बातचीत की कोशिश की। बबलू अधिकतर अंग्रेजी में बात करता था। जिससे युवाओं को शंका हुई। हिंदी में उसके जिला और कलेक्टर का नाम भी पूछा, जो उसने सही बताया। गूगल पर सर्च करने पर नाम व पता सहित निकला। इसके बाद गोंडा जिले के कलेक्टर को ई-मेल भेजा और परिजन से बबलू को मिलवाने की गुहार लगी। कलेक्टर से संपर्क होने के बाद अधीनस्थ कर्मचारी बबलू का फोटो लेकर उसके घर पहुंचे। मेल पर पहुंचा फोटो देखकर मां ने तुरंत पहचान लिया और दो दिन का सफर कर करैरा पहुंचीं। मां को देखकर बबलू ने कहा कि यह मेरी मां है। उसने अपने भाई रवि को भी पहचान लिया।
नौकरी की तलाश में गया था बबलू
मां अन्ना बाई का कहना है कि बबलू लंबे समय से नौकरी की तलाश में था। इस बीच बहन की शादी की चर्चा चली। इसलिए वह उत्तर प्रदेश-नेपाल की सीमा पर नौकरी की तलाश में घर से निकल गया था। संभवत: नौकरी नहीं मिल पाने की वजह से बबलू अपना मानसिक संतुलन खो बैठा और किसी तरह भटकता हुआ करैरा पहुंच गया।