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मुख्यमंत्री ने 70% से अधिक अंक लाने वालों को दिया कॅरियर मार्गदर्शन, छात्रों से किया सीधा संवाद

3 वर्ष पहले
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सर, मैं ओबीसी वर्ग से और मेरा दोस्त एससी वर्ग से है। हम दोनों ने साथ पढाई की। मेरे 81 फीसदी नंबर आए फिर भी लेपटॉप नहीं मिला, जबकि एससी वर्ग वाले दोस्त को 77 फीसदी अंक पर ही लैपटॉप मिल गया। शिक्षा में आरक्षण क्यों। भोपाल के इस छात्र ने सोमवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीधे संवाद के दौरान यह प्रश्न पूछा तो शिवपुरी के उत्कृष्ट स्कूल में बैठे छात्र-छात्राओं ने जमकर तालियां बजाकर समर्थन किया। इस पर सीएम ने कहा कि बगीचे में सब तरह के अलग अलग फूल होते हैं। माली को सबका ख्याल करना पड़ता है। ऐसे में हमें भी सबका ध्यान रखना पड़ता है। मालूम हो कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सोमवार को करियर मार्गदर्शन छू लेंगे आसमान योजना का शुभारंभ कर कहा कि प्रदेश सरकार ने विद्यार्थियों के हित में बहुत सारी योजनाएं चलाई हैं, उनका लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा। मुख्यमंत्री ने 70 फीसदी से अधिक अंक लाने वालों को करियर मार्गदर्शन देने के लिए सीधा संवाद किया।

मैं ओबीसी, मेरे एससी वर्ग के दोस्त को मुझसे कम नंबर पर लैपटॉप मिला, मुझे ज्यादा पर भी क्यों नहीं ... सीएम बोले- बाग के हर फूल का ध्यान रखना पड़ता है

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सीधा संवाद करते छात्र-छात्रा।

3965 में से 1155 उपस्थित : इस आयोजन में प्रोजेक्टर पर सवाल जवाब का सीधा प्रसारण दिखाया गया। टीवी भी लगाई, जिसमें जिले के 3965 में से 1155 छात्रों ने भागीदारी की। इसमें पोहरी के 120,बदरवास के 180,करैरा के 165,शिवपुरी 235,पिछोर 175,खनियाधाना 40, नरवर में 40 और कोलारस में 200 विद्यार्थियों ने भागीदारी की। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी परमजीत सिंह गिल, उत्कृष्ट स्कूल के प्राचार्य विवेक श्रीवास्तव, एमयू शरीफ, बीआरसी अंगद सिंह तोमर सहित कई शिक्षक मौजूद थे।

मुख्यमंत्री ने बताया- कक्षा 7 में ही मजदूरों को कम मजदूरी मिलने पर किया था आंदोलन

भोपाल की गुंजन सिंह ने कहा मैं राजनीति में आना चाहती हूं। इसके लिए क्या तैयारी करनी पड़ती है। मैं आप जैसी सफल राजनीतिज्ञ बन सकती है क्या। इसके लिए क्या विशेष योग्यता है।

अच्छे लोगों को राजनीति में आना चाहिए। हालांकि यह रास्ता बाहर से बेहद आसान नजर आता है पर होता बहुत कांटों भरा है। इसमें झूठे आरोप-प्रत्यारोप भी लगते हैं। दिल में देश सेवा का जज्बा हो और अपने लिए नहीं दूसरे के लिए सोचने की शक्ति हो तो आप भी सफल राजनीतिज्ञ बन सकती हैं।

भोपाल की मोहनी सागर ने पूछा कॅरियर को चुनते समय परेशानी अक्सर होती है, आपने कैसे अपना प्रोफेशन चुना।

मेरे परिजन मुझे डॉक्टर बनाना चाहता थे पर मुझे फ्रोग का डिसेक्शन पसंद नहीं था। मन में कुछ करने की रुचि जरूर थी। जब मैं कक्षा 7 में पढ़ता था तो मजदूरों को मिलने वाली कम मजदूरी के लिए आंदोलन किया। हाथों में लाठी और पेट्रोमेक्स लेकर कुछ मजदूरों के साथ रात को निकले। जब चाचाजी के घर के सामने से निकले तो उन्होंने हाथ का लठ्ठ छुड़ाया और झापड़ लगाया। मजदूर पेट्रोमेक्स छोड़कर भाग गए। पर मेरी दिशा तय हो गई और जनसेवा के क्षेत्र में आ गया। इसलिए दिल जो कहे उसे मानो।

भिंड के छात्र रोहित श्रीवास्तव ने पूछा कि सर, मैं भिंड के उत्कृष्ट विद्यालय से हूं और मैंने 89.5 फीसदी अंक कला संकाय से प्राप्त किए हैं। अब मैं दिल्ली विश्वविद्यालय या नेहरू यूनिवर्सिटी से बीए ऑनर्स करना चाहता हूं, क्या आप मेरी वहां भी फीस भरेंगे।

क्यों नहीं, हम मेधावी विद्यार्थियों को सभी जगह सहायता देंगे।

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