कराहल|जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में यातायात सुधार के लिए निर्णय तो लिए गए, लेकिन बात अमल पर अटकी हुई है। सड़क सुरक्षा समिति ने सड़क हादसों को रोकने की दृष्टि से शिवपुरी-पाली हाईवे पर अंधे मोड़ों पर संकेतक बोर्ड लगाने का फैसला किया था। लेकिन सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा 5 साल बाद भी किसी एक भी अंधे मोड़ पर संकेतक बोर्ड लगाने की पहल नहीं की गई है। नतीजन हाईवे रोड पर सफर करते समय वाहन चालकों की जरा सी चूक दुर्घटना का कारण बन रही है। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से सफर के दाैरान लाेग आशंकित रहते हैं। हाईवे पर दिनाेंदिन बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं काे लेकर पुलिस प्रशासन भी परेशान हैं। एमपीआरडीसी के अफसर भी अंधे मोड़ पर चेतावनी बोर्ड लगवाने के लिए निर्माण एजेंसी को रिमाइंडर दे चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी निर्माण एजेंसी पर कोई असर नहीं हो रहा है। दरअसल शिवपुरी-पाली हाईवे पर श्योपुर से लेकर नोनपुरा घाटी तक 60 किलोमीटर लंबे दायरे मेें 30 खतरनाक मोड़ पड़ते है। इन अंधे मोड़ पर वाहन चालकों की जरा सी चूक दुर्घटना का कारण बन जाती है। तीन साल पूर्व जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में हाईवे पर स्थित अंधे मोड़ का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। समिति ने अंधे मोड़ पर चेतावनी (संकेतक) बोर्ड लगाए जाने का प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। हाईवे पर जानलेवा बने यह मोड़ अब तक कई जिंदगियां लील चुके हैं, कई लोग जख्मी हो चुके हैं।