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11वीं में संकाय चयन में आसानी के लिए पहली बार होगा अिभरुचि टेस्ट

3 वर्ष पहले
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आरएमएसए के एडीपीसी एमयू शरीफ का कहना है कि प्रदेश के स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा 10 वीं के विद्यार्थियों को अपनी पूर्ण क्षमता के उपयोग के लिए सशक्त बनाने का यह संपूर्ण कार्यक्रम तीन चरणों में होना है।

इसके प्रथम चरण में फरवरी माह में सभी सरकारी स्कूलों में 10वीं के छात्रों का इंट्रेस्ट टेस्ट या अभिरुचि परीक्षण कराया जा चुका है। जिसकी रिपोर्ट ऑनलाइन आरएमएसए की पोर्टल पर दर्ज है।

अब दूसरे चरण में 10वीं के विद्यार्थियों का क्षमता परीक्षण या एप्टीट्यूड टेस्ट कराया जा रहा है। जो कि 9 अप्रैल से शुरू हो चुका है और 21 अप्रैल तक पूरा करना है।

एप्टीट्यूड टेस्ट के बाद तीसरे चरण में विद्यार्थियों और उनके पालकों की स्कूल में काउंसलिंग की जाएगी, इसके बाद विद्यार्थियों की क्षमताओं की पहचान हो सकेगी।

206 हाई स्कूलों में 60 फीसदी बच्चों का हुआ एप्टीट्यूड टेस्ट

इस पूरे ऑनलाइन कार्यक्रम के पहले चरण में विद्यार्थियों की रुचियों की पहचान कर अब दूसरे चरण में विद्यार्थियों का एप्टीट्यूड टेस्ट 9 अप्रैल से सरकारी स्कूलों में चल रहा है। जिसमें अभी तक जिले के 206 हाई स्कूलों के 60 फीसदी बच्चों का एप्टीट्यूड टेस्ट हो चुका है। हायर सेकंडरी स्कूल सेसई सड़क में 80 फीसदी बच्चों का टेस्ट हो चुका है। यह प्रक्रिया 21 अप्रेल तक पूरी होनी है।

75 मिनट में चार दक्षताओं का टेस्ट

इस परीक्षण के लिए शिक्षकों के मोबाइल में एमपी कॅरियर मित्र एप को डाउनलोड करना है। एप डाउनलोड करते समय ही इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होगी। फिर टेस्ट के दौरान इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होगी। इसके लिए प्रति विद्यार्थी के मान से कम से कम एक मोबाइल उपलब्ध कराना होगा। यह पूरा एप्टीट्यूड टेस्ट 75 मिनट का होगा। जिसमें चार दक्षताओं का टेस्ट होगा। भाषा 15 मिनट, गणित 20 मिनट, तार्किक 20 मिनट तथा स्थान विषयक 20 मिनट के टेस्ट में 75 प्रश्न हल करने होंगे। इसकी प्रविष्टि प्राचार्यों द्वारा उपस्थिति रजिस्टर पर करनी होगी।

21 अप्रैल तक होना है 10वीं के सभी बच्चों का टेस्ट

स्कूल शिक्षा विभाग भोपाल द्वारा कक्षा 10वीं में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों की क्षमता के परीक्षण के लिए एप्टीट्यूड टेस्ट कराया जा रहा है। जोकि 21 अप्रैल तक पूरा करना है। टेस्ट की रिपोर्ट रोजाना ऑनलाइन की जा रही है। इसके बाद अब छात्रों और पालकों की काउंसिलिंग होगी। जिससे उनकी अभिरुचि पता चलेगी। परमजीत सिंह गिल, जिला शिक्षा अधिकारी शिवपुरी

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