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आंखों से दिव्यांग और मूक बधिर बच्चों के लिए 40 लाख रुपए से बनेगा हॉस्टल

3 वर्ष पहले
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आंखों से दिव्यांग और मूक बधिर बच्चों के साथ मानसिक विकृति के जन्मजात बच्चों के लिए न केवल पढाई के लिए स्कूल बनेगा वरन रहने के लिए आशियाना भी मंगलम बनाएगी। इसके लिए मंगलम ने एक प्रस्ताव सीएसके के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को दिया जिसे उसने स्वीकार कर जिले के दिव्यांग के लिए एक बडी सौगात दी है।

अब तक दिव्यांग के लिए एक एनजीओ द्वारा स्कूल का संचालन किया जाता था लेकिन इसके रिन्यू न होने से अब दिव्यांग बच्चों के लिए परेशानी खड़ी हो गई। जिसे दूर करने के लिए मंगलम समाजसेवी संस्था ने एक नई पहल शुरु करते हुए दिव्यांग बच्चों को न केवल शिक्षित करने की ठानी है वरन इन बच्चों के लिए आवासीय सुविधा के साथ इन्हे योग्य बनाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।खास बात यह है कि इतनी बडी राशि अब तक किसी भी एनजीओ को जिले में एक साथ इस तरह से नहीं मिली है। पहली बार इतनी बडी राशि मिलने से अब दिव्यांग की जिंदगी संवरना भी तय है।

जून में पूरी होगी बिल्डिंग और जुलाई में शुरु हो जाएगा आवासीय नि:शुल्क विद्यालय : बकौल इंजीनियर राजेंद्र मजेजी मंगलम ने कंपनी को प्रस्ताव दिया था कि आप अपने नोर्मस अनुसार बिल्डिंग का निर्माण कराएं और तकनीकी व्यवस्थाएं भी आप देखें इस बात को कंपनी ने स्वीकार लिया और खास बात यह है कि यह बिल्डिंग कार्य शुरु हो गया है जो 2 माह में बनकर पूरा हो जाएगा। और जुलाई 2017 से यहां दिव्यांग बच्चों के आवासीय प्रवेश भी शुरु हो जाएंगे। ं

कंपनी ने व्यवस्थाएं देखीं तो 12 की जगह दिए 40 लाख

मंगलम के सचिव इंजीनियर राजेंद्र मजेजी की माने तो संस्था ने इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन को दिव्यांग बच्चों की मदद के लिए एक हॉल का प्रस्ताव तैयार कर दिया था जिसमें तकरीबन 12 लाख के खर्च का एस्टीमेट शामिल था,इस एस्टीमेट की प्राप्ति के बाद इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन का दल शिवपुरी आया जिसमें मंगलम में संचालित वृद्धाश्रम और डे केयर सेंटर को देखा। यहां के फिजियोथेरापी सेंटर सहित कृत्रिम अंग निर्माण केंद्र को देखकर संस्था की गतिविधियों को टीम ने सराहा और प्रस्ताव के बाबत टीम के जाने के बाद जब दोबारा चर्चा हुई तो आईओसी के वरिष्ठ अफसरों का कहना था कि इतनी कम रकम से हॉल तो बन जाएगा पर दिव्यांग के लिए रहने और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था कहां से होगी। इसलिए आप नए सिरे से पूरी व्यवस्थाओं का एक एस्टीमेट तैयार कीजिए। इसके बाद मंगलम ने एक प्रस्ताव तैयार किया जिसमें 40 लाख कनकी लागत से बेल फर्निश्ड रूम और 4 हॉल के साथ 20 बच्चों के लिए प्रारंभिक चरण में 20 पलंग और अन्य सुविधाओं का एस्टीमेट दिया जिसे सीएसके अर्थात कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत प्रस्ताव स्वीकार किया गया और बिल्डिंग का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ।

अभी 20 दिव्यांग को मिल रही ट्रेनिंग

मंगलम ने प्राथमिक तौर पर यहां 10 मूक बधिर और 10 आंखों से दिव्यांग बच्चों के लिए कक्षाएं शुरु की है जिसमें ब्रेल लिपि से आंखों से दिव्यांग बच्चों को शिक्षा मेडम श्रीवास्तव के माध्यम से मिल रही है वहीं साइन लेंग्वेज के माध्यम से मुकेश जाटव द्वारा 10 मूक बधिर बच्चों के लिए शिक्षा दी जा रही है। लेकिन अब जुलाई से आवासीय बच्चों को यहां पढाई के साथ साथ रहने के लिए स्थान मिल जाएगा।

इससे दिव्यांगों को आशियाना मिल जाएगा

सेवा गतिविधियों के मंगलम कोई नया नाम नहीं है,हम प्रयासरत थे कि दिव्यांग बच्चों के लिए भी कुछ सकारात्मक गतिविधि शुरु की जाए और इसके लिए जब आईओसी को प्रस्ताव दिया तो उन्होंने बड़ा प्रस्ताव दोबारा बनाकर लाने को कहा। इस केंद्र के बन जाने से अब दिव्यांग बच्चों को आशियाना मिलेगा। जुलाई में हम इसकी शुरुआत कर देंगे। इंजीनियर राजेंद्र मजेजी,मानसेवी सचिव मंगलम।

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