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खूनी वारदातों की वजह बनी 92 बीघा जमीन की सौदेबाजी

3 वर्ष पहले
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किशनगढ़ के निकट परासिया रोड पर बेशकीमती 92 बीघा जमीन खूनी वारदातों का कारण बन गई है। इसी जमीन के सौदे में हिस्से को लेकर रामकेश मीणा की हत्या हो चुकी है, इसके बाद भू कारोबार में रामकेश के साथी रहे वकील सुरेन्द्र चौधरी को भी जान से मारने की साजिश रची गई थी। दो दिन पहले किशनगढ़ के भू कारोबारी प्रदीप जैन पर फायरिंग की साजिश रचने वाला गजनी रामकेश मीणा की हत्या का आरोपी है, जबकि जैन पर फायरिंग की वारदात में शामिल गिरफ्तार आरोपी रामस्वरूप उर्फ शूटर और शुभम चौधरी को पूर्व में वकील सुरेन्द्र चौधरी की हत्या की साजिश रचने के आरोप में अलवर गेट थाना पुलिस जांच के घेरे में ले चुकी है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि भू कारोबार में बड़ी राशि का इन्वेस्ट करने वाले व्यवसायियों ने कारोबार में मुनाफा कमाने के लिए आपराधिक गिरोह को शामिल कर मोटी राशि कमाई और आपराधिक गिरोह के मुनाफे का हिस्सा भी खुद डकार गए। नतीजतन आपराधिक गिरोह हिस्सा राशि वसूलने के लिए खूनी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

भू कारोबारी सुरेंद्र चौधरी भी है गिरोह के निशाने पर
रामकेश मीणा हत्याकांड के बाद उसके प्रापर्टी कारोबार की राशि के बंटवारे को लेकर गिरोह के लोगों के बीच रंजिश पनप रही है। रामकेश की हत्या के बाद गिरोह का संचालन कर रहे संजय मीणा ने पिछले दिनों जेल से रामकेश के साथी रहे प्रापर्टी डीलर वकील सुरेन्द्र सिंह चौधरी को जान से मारने की धमकियां दी थी। संजय मीणा ने चौधरी से रामकेश की पार्टनर शिप में किए किशनगढ़ के परासिया रोड इलाके में 92 बीघा जमीन के सौदे के मुनाफे की हिस्सा राशि करीब 60 लाख रुपए की डिमांड कर रहा है। राशि नहीं चुकाने पर उसने चौधरी को मौत के घाट उतारने की धमकी दी है। उल्लेखनीय है कि संजय मीणा हिस्ट्रीशीटर धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड में मुख्य आरोपी है। उल्लेखनीय है कि भू कारोबारी सुरेन्द्र चौधरी वरूण चौधरी गैंग के भी निशाने पर है। रामकेश मीणा हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार कुख्यात वरुण चौधरी के चचेरे भाई सहित गिरोह के 5 बदमाशों को पुलिस की स्पेशल टीम ने आठ महीने पहले दबोचा था। खुलासा हुआ था कि गिरोह के निशाने पर धर्मेंद्र चौधरी हत्याकांड के मुख्य आरोपी संजय मीणा व उसका साला रजत मीणा, रामकेश मीणा के नजदीकी एडवोकेट सुरेंद्र चौधरी और एक कारोबारी थे। पुलिस की सतर्कता से वारदात से पहले ही गिरोह को पकड़ लिया गया था। गिरफ्तार आरोपियों से दो पिस्टल, एक देशी कट्टा और तीन रायफल व 65 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।

धर्मेंद्र चौधरी व रामकेश मीणा दोनों का हिस्सा खा गए भू कारोबारी

जानकारी के अनुसार बड़े भू कारोबारियों ने विवादित जमीनों के सौदे करने के लिए आपराधिक गैंग को कारोबार में हिस्सेदार बना लिया था। इसमें धर्मेंद्र चौधरी गैंग और रामकेश मीणा, संजय मीणा गिरोह प्रमुख थे। किशनगढ़ के भू कारोबारी प्रदीप जैन ने परासिया रोड़ स्थित 92 बीघा जमीन बेचने का एग्रीमेंट वर्ष 2014 में रामकेश मीणा और अक्षणि गुप्ता के नाम किया था। भू कारोबारी आदर्शनगर निवासी सुरेन्द्र चौधरी इस सौदे सूत्रधार था। इसमें रामकेश मीणा ने 60 लाख रुपए का इन्वेस्ट किया था। एग्रीमेंट पर सवा करोड़ रुपए का भुगतान किया गया था। धर्मेंद्र चौधरी का इस सौदे में तीस फीसदी मुनाफा राशि की पार्टनर शिप थी। बताया जाता है कि धर्मेंद्र चौधरी की हत्या के बदले के तौर पर वरूण चौधरी ने साजिश पूर्वक रामकेश मीणा की हत्या करवा दी। रामकेश मीणा की हत्या के बाद भू कारोबारी सुरेन्द्र चौधरी ने प्रदीप जैन से मिलकर रामकेश और गुप्ता के नाम जमीन का एग्रीमेंट रद्द करवा दिया। सुरेन्द्र चौधरी ने रामकेश मीणा की प|ी और पिता को साठ लाख रुपए का चेक देकर यह भरोसा दिलाया था कि कैश राशि का भुगतान तीन महीने में कर दिया जाएगा। भरोसे में रामकेश की प|ी और पिता ने एग्रीमेंट रद्द करने के कागज पर हस्ताक्षर कर दिए थे। भू कारोबारी सुरेन्द्र चौधरी ने एग्रीमेंट निरस्त करवा कर रामकेश की भागीदारी से मुक्ति पा ली, लेकिन वादे के मुताबिक रामकेश के परिजनों को साठ लाख रुपए का भुगतान नहीं किया। रामकेश की प|ी ने वकील के माध्यम से सुरेन्द्र चौधरी को इस बारे में कानूनी नोटिस भी दिया है। इसी तरह भू कारोबारी प्रदीप जैन ने भी धर्मेंद्र चौधरी की हिस्से की मुनाफा राशि हड़प कर ली। इसकी वसूली के लिए अब धर्मेंद्र चौधरी के भतीजे वरूण चौधरी और अन्य साथी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि धर्मेंद्र चौधरी के भतीजे वरूण गिरोह के बदमाशों ने 30 जनवरी को श्रीनगर रोड पर रामकेश मीणा पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी मुख्य शूटर सुरेंद्र सहित धर्मेंद्र चौधरी के सगे भाई सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। धर्मेंद्र चौधरी के बाद उसके गिरोह की कमान संभाल रहा वरुण व अन्य आरोपी अभी पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। साफ संकेत मिल रहे हैं कि अपराधियों का एक नया सिंडीकेट पनप रहा है।

प्रापर्टी कारोबार की रंजिश में हुई धर्मेंद्र और रामकेश की हत्या, अब गिरोह में ही मचा घमासान

प्रापर्टी कारोबार में आपराधिक गिरोह की लिप्तता के चलते ही हिस्ट्रीशीटर धर्मेंद्र चौधरी और बदले में रामकेश मीणा की हत्या हुई थी। पिछले कुछ सालों से अजमेर में प्रोपर्टी कारोबार में बाहर के बदमाश सक्रिय हैं। इनमें विक्रम शर्मा, धर्मेंद्र चौधरी सहित अन्य गिरोह शामिल थे। विक्रम आैर चौधरी पहले साथ काम करते थे, बाद में विवाद हुआ तो दोनों अलग-अलग गैंग बनाकर जमीनों पर कब्जे करने लगे थे। दोनोंं गिरोह में परस्पर जानलेवा हमले की तीन वारदात हो चुकी हैं। कोटड़ा इलाके में विक्रम शर्मा पर फायरिंग के आरोप में धर्मेंद्र चौधरी और उसके गुट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था, जबकि अजमेर क्लब के निकट बेशकीमती मिशन की जमीन पर कब्जे के विवाद में चौधरी के भतीजे वरुण चौधरी पर जानलेवा हमला किया गया। इस मामले में विक्रम शर्मा, संजय मीणा, रामकेश और अन्य लोगों की लिप्तता बताई थी। धर्मेंद्र चौधरी की हत्या इंडोर स्टेडियम के बाहर फायरिंग कर की गई। इसके बाद गिरोह संचालन कर रहे वरुण ने संजय मीणा को जेल से कोर्ट के बीच मारने की साजिश रची थी, लेकिन दो तारीख पेशी में संजय हाजिर ही नहीं हुआ था। यही कारण रहा कि राजेश चौधरी और वरुण चौधरी ने संजय के करीबी रामकेश को निशाना बना दिया।

भू कारोबार में हिस्सा वसूलने की है रंजिश | एसपी राजेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि भू कारोबारी प्रदीप जैन को मारने के लिए फायरिंग और इससे पूर्व हुई रामकेश मीणा की हत्या व अन्य वारदातें भू कारोबार से जुड़ी हुई है। मुनाफे का हिस्सा वसूलने के लिए गिरोह वारदात कर रहे हैं। किशनगढ़ के भू कारोबारी पर फायरिंग मामले के मास्टरमाइंड जेल में बंद गजनी को भी गिरफ्तार कर पूछताछ की जाएगी।

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