आज मनाएंगे श्रीमाधोपुर का 258वां और दांता का 349वां स्थापना दिवस
श्रीमाधोपुर| कस्बा बुधवार को 258वें वर्ष में प्रवेश करेगा। 18वीं सदी के पूर्वार्द्ध वैशाख शुक्ल तृतीय (अक्षया तृतीया) को श्रीमाधोपुर की स्थापना की थी। 1945 में नगरपालिका की स्थापना हुई। श्रीमाधोपुर नगर के संस्थापक खुशालीराम बोहरा थे। कस्बे का नामकरण बोहरा ने जयपुर महाराजा माधवसिंह के नाम पर पदवी को आधार मानते हुए श्रीमाधोपुर किया। नगर में सर्वप्रथम संवत 1820 में गढ़ की नींव व श्रीगोपीनाथ मंदिर, चौपड़ में शिव मंदिर एवं पंडित कुशालीराम मिश्र की हवेली का निर्माण हुआ। 1907 में बनी फुलेरा-रेवाड़ी रेल लाइन से कस्बा जुड़ा तथा समय के साथ नगर विकास की गति भी बढ़ती गई। सन 1889 में खटोड़ा पाठशाला से शुरू हुए शिक्षा के सफर में आज आधा दर्जन से ज्यादा निजी महाविद्यालय, एक राजकीय संस्कृत महाविद्यालय कस्बे में शिक्षा की अलख जगा रहे है। कस्बे में स्थापित रोडवेज डिपो ने श्रीमाधोपुर को परिवहन की दृष्टि में सुदृढ़ किया। नगर में कृषि उपज मंडी की स्थापना व्यापार के लिए मील का पत्थर बनी और व्यापारिक दृष्टिकोण को नई ऊंचाइयां प्रदान की।
दांता| कस्बे का 349वां स्थापना दिवस बुधवार को है। दांता ग्राम पंचगिरी के नाम से जाना जाता था। क्योंकि यहां पांच पर्वत हैं। बाद में दातली तलाई के नाम से और फिर दांता के नाम से प्रसिद्ध हुआ। दांता राजस्थान में तीसरी बड़ी पंचायत व सीकर जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। दांता को संवत 1726 में आखातीज को ठाकुर अमरसिंह ने बसाया था। दांता संस्थापक ठा. अमरसिंह से लेकर अंतिम शासक मदनसिंह तक 16 राजाओं ने राज किया। इस दौरान उन्होंने दांता में नृसिंह मंदिर व हनुमान मंदिर बनवाए। विक्रम संवत 1795 में पहाड़ पर गढ़ का निर्माण करवाया। विक्रम संवत 1811 में नीचे वाला गढ़ बनवाया। दांता में 115 खंभों की विशाल छतरी बनी हुई है। उन्होंने उदय बिहारीजी का मंदिर भी बनवाया था। जयपुर में दांता हाउस बनवाया। करणीकोट माला पर शिकारगाह व प्रेम सरोवर तालाब बनवाया। दांता संस्थापक के मदनसिंह अपने पूर्वज अमरसिंह से सोलहवीं पीढ़ी पर थे। ठा. मदनसिंह भू-स्वामी आंदोलन के अध्यक्ष रहे थे एवं दांतारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के तीन बार विधायक रहे थे।