जन्म के साथ मृत्यु की यात्रा प्रारंभ हो जाती है
शुजालपुर | जन्म के साथ मृत्यु की यात्रा प्रारंभ हो जाती है और मृत्यु अटल है, फिर किस बात का भय। ये भगवान की कथा हमें मरना सिखाती है। मरना भी एक कला है कि मरो, तो ऐसे की बार-बार मरना न पड़े। उक्त विचार पंडित राम कृष्ण उपाध्याय ने भागवत कथा के प्रथम दिन व्यक्त किए। कथा के पूर्व शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से निकाली गई ।