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ट्रोमा के वेंटिलेटर व आईसीयू का नहीं हो रहा इस्तेमाल, डेढ़ माह में 100 से ज्यादा मरीज रैफर

3 वर्ष पहले
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एसके अस्पताल के ट्रोमा में वेंटिलेटर व आईसीयू वार्ड का सालों से उपयोग नहीं हो रहा। गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर या आईसीयू में रखने के बजाय जयपुर रैफर कर दिया जाता है। डेढ़ महीने में ट्रोमा वार्ड से 100 से अधिक मरीज गंभीर हालत में जयपुर रैफर किए गए। ट्रोमा में वेंटिलेटर व आईसीयू वार्ड शुरू नहीं किए जाने के पीछे न्यूरोसर्जन नहीं होने की वजह बताई जाती है। ट्रोमा वार्ड के इंचार्ज फूलचंद सैनी ने बताया कि न्यूरोसर्जन नहीं होने से यहां गंभीर हालत में आने वाले मरीजों की सर्जरी नहीं हो पाती और उन्हें जयपुर रैफर कर दिया जाता है। यहां सर्जरी के लिए जरूरी उपकरणों व जांच सुविधाओं की भी कमी है। जिसकी वजह से यहां आने वाले एक्सीडेंट, हार्ट अटैक, हैड इंजरी के मरीजों को जयपुर भेजा जाता है। पीएमओ डॉ. एसके शर्मा ने बताया कि ट्रोमा में दो वेंटिलेटर हैं, जिनका उपयोग नहीं हो रहा है। वेंटिलेटर को सही कराकर उपयोग में लिया जाएगा। अस्पताल में न्यूरोसर्जन समेत कई स्पेशलिस्ट व सर्जरी की सुविधाओं की कमी है। इस वजह से गंभीर मरीजों को रैफर करना पड़ता है।

ट्रोमा यूनिट का आईसीयू।

नहीं मिल रही सुविधाएं, एंबुलेंस के वेंटिलेटर के भरोसे मरीज

एक्सीडेंट व अन्य गंभीर मरीजों को रखने के लिए ट्रोमा में वेंटिलेटर नहीं होने से 108 एंबुलेंस का वेंटिलेटर ही एकमात्र विकल्प है। जिससे सीरियस मरीजों को अस्पताल में लाया व जयपुर भेजा जाता है। डॉक्टर्स का कहना है कि यहां न्यूरोसर्जन व न्यूरोलॉजी से संबंधित सबसे अधिक मरीज जयपुर भेजे जाते हैं। इसके अलावा कार्डियोलॉजी, ओमिको सर्जरी, रेडियो थेरेपी, यूरोलॉजी व नेफ्रोलॉजी जैसी सुविधाएं अस्पताल में नहीं होने के कारण मरीजों को रैफर करना पड़ता है।

ट्रोमा में लगा रहता है गंदगी का ढेर | ट्रोमा में सफाई के हाल बिगड़े हुए हैं। आईसीयू में बेड व गद्दे बिना उपयोग के अव्यवस्थित पड़े हैं। जिसपर धूल की परतें जमी हैं। इसके अलावा यहां के मेडिकल कक्ष व बाहर भी नियमित रूप से सफाई नहीं की जाती। उल्लेखनीय है कई बार मंत्री, स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी निरीक्षण के दौरान गंदगी को लेकर अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगा चुके हैं। इसके बावजूद सुधार नहीं हुआ।

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