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अक्षय तृतीया: अबूझ सावे पर बजी शहनाइयां, 700 से ज्यादा शादियां हुई

3 वर्ष पहले
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मलमास समाप्त होने के बाद शादी के लिए बुधवार को अक्षय तृतीया का सबसे पहला सर्वश्रेष्ठ और अबूझ मुहूर्त रहा। कई युवाओं ने सात फेरों के साथ नए जीवन की शुरुआत की। शादी-ब्याह, शुभ कार्यों की शुरुआत से लेकर बाजार से सोना-चांदी की खरीदारी के लिए अबूझ मुहूर्त के कारण बाजार में भीड़ रही। शहर की सड़कों पर बैंडबाजों के साथ बारातें निकली। जानकारों के अनुसार अबूझ सावे पर 700 से ज्यादा शादी समारोह हुए। वहीं मंदिरों में भगवान की सेवा में बदलाव किया गया।

श्रीजी ने लिया भगवान परशुराम का रूप





महामंदिर रोड स्थित कल्याणजी मंदिर में श्रीजी को भगवान परशुराम का स्वरूप दिया गया। महंत विष्णुप्रसाद शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर श्रीजी का दूध, पानी, चंदन का जल, पंचामृत सहित कई विभिन्न प्रकार के द्रव्यों से अभिषेक कर फरसा एवं धनुष धारण करवार कर भगवान परशुराम का स्वरूप दिया गया। इसमें भगवान काे चंदन का लेप किया गया। इसके बाद भगवान को तुलसी के पत्ते भी अर्पित किए। इसी क्रम में सुभाष चौक स्थित गोपीनाथ मंदिर में भगवान को चंदन की लेप की विशेष पोशाक धारण कराई गई। मंदिर के महंत सुरेंद्र गोस्वामी ने बताया कि भगवान के शरीर पर चंदन का लेप किया गया। इस अवसर पर घरों में गुड़ का चूरमा बनाया गया। परंपरा के अनुसार कई बच्चों के नाक-कान में आखातीज पर बाली पहनाई गई।

गोपीनाथ जी को लगाएं चंदन का लेप

तृतीया बाद अधिकमास व कई कारणों से विवाह नहीं

शादी का अंतिम श्रेष्ठ मुहूर्त 12 मई को है। 16 मई से अधिकमास लगेगा जो 13 जून तक चलेगा। अधिकमास में शादियां नहीं होगी। जून में 19 तारीख से मुहूर्त हैं। जुलाई में 10 तारीख तक ही शादियां होगी। 14 जुलाई से कर्क संक्रांति शुरू होने से शादी समारोह नहीं होंगे। पं रामअवतार मिश्र ने बताया 18 अप्रैल के अबूझ मुहूर्त के बाद विवाह के लिए 19, 20, 26, 29, मई में 11, 12, जून में 19, 20, 21, 22, 23, 25, 29 व जुलाई में 6,10 तारीख को श्रेष्ठ मुहूर्त आएंगे।

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