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शहर में 50 बड़े रसूखदार चला रहे हैं सूदखोरी का नेटवर्क, एजेंट कमीशन पर करते हैं वसूली

3 वर्ष पहले
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शहर में सूदखोरी का जाल बेहद गहराई तक फैल चुका है। ज्यादातर मामलों में सूदखोरों के एक ही नाम सामने आ रहे हैं। यह पूरा नेटवर्क 50 बड़े रसूखदारों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। मलकेड़ा दंपती, पुरोहितजी की ढ़ाणी में युवक, बूबना व जावेद मौत प्रकरण, ठेला चालक, कारोबारी के जहर खाने सहित अन्य सूदखोरी से जुड़े मामलों को स्कैन करने पर सामने आया कि प्रत्येक 10 में से चार सूदखोरों का नाम हर घटना से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ रहा है। पिछले साल सूदखोरी के करीब 200 मामले दर्ज हुए। ज्यादातर में पुलिस ने एफआर लगा दी। सूदखोरों की वसूली से तंग आकर पांच लोग जान दे चुके हैं, लेकिन सूदखोरों पर पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। लगातार सूदखोरी के मामले सामने पर दैनिक भास्कर ने पूरे मामले पर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। सामने आया कि सूदखोरों ने लोगों को फंसाने के लिए सिस्टम बना रखा है। कमीशन के तहत एजेंट काम करते हैं। सूदखोर एक से दूसरे व्यक्ति की गारंटी और प्रोपर्टी के दस्तावेजों के आधार फाइनेंस करते हैं। पैसा उधार देते वक्त गारंटी के नाम पर प्लॉट के कागजात, साइन किए गए खाली स्टांप व चेक लिए जाते हैं।

टूटे सूदखोरी का
यूं चलता है काले कारोबार का नेटवर्क और दबाव का खेल
1. कमीशन के लालच में सक्रिय रहते हैं एजेंट | सूदखोरों ने इस काम के लिए एजेंट बाजार में उतार रखे हैं जो कमीशन के लालच में जरूरतमंद लोगों को कर्ज दिलवाते हैं। जानकार लोगों की गवाही पर 10 से 30 रुपए प्रति सैंकड़ा ब्याज पर पैसा उधार दिया जाता है।

2. एजेंट भेजकर दूसरे से दिलवाते हैं पैसा | जब पीड़ित सूदखोर का पैसा नहीं चुका पाता है तो नेटवर्क से जुड़े लोग उसके पास दूसरा एजेंट भेजते हैं। वह एक सूदखोर से पीछा छुड़ाने के लिए दूसरे सूदखोर से पैसा उधार दिलवा देता है।

3. प्रोपर्टी पर कब्जा | किश्त चुका पाने में असमर्थ होने पर पैसा उधार लेने वाले व्यक्ति पर जमीन या प्रोपर्टी बेचने का दबाव बनाया जाता है।

अब तक सामने आ चुके है ये नाम | सूदखोरी के पिछले दो साल में पुलिस तक पहुंचे मामलों में ये नाम सामने आए। बूबना प्रकरण में जगदीश उर्फ जेडी, राधेश्याम उर्फ मोंटी, महेश ढाका, जावेद प्रकरण में सलीम भाटी, रणवीर, कल्लू प्रकरण में अनिल सोनी, इमरान प्रकरण में अशोक, इमरान के नाम आए हैं। वहीं मलकेड़ा दंपती आत्महत्या प्रकरण में अमित, राकेश, जितेन्द्र सिंह, अभिषेक पिलानियां, देवेन्द्र, सुभाष खीचड़, विष्णु सैनी, शीशराम भंवरिया, प्रेम चौधरी, हरी चौधरी, शेरसिंह राजपूत, सुरेश कुमार, अंकित उर्फ विनीत का नाम आया था। वहीं रंगा-बिल्ला, शांति उर्फ श्याना का नाम भी सूदखोरी को लेकर काफी चर्चा में रहा हैं।

मौत से पहली रात 12.30 बजे तक सूदखोर सलीम के साथ था जावेद, उसने ही घर तक छोड़ा
सीकर | सूदखोरी के चलते आत्महत्या करने वाले वार्ड 30 के मोहम्मद जावेद के मामले में शनिवार को नया खुलासा हुआ है। जावेद के भाई मोहम्मद शरीफ ने बताया कि उसका भाई जावेद अपनी मौत से पहले देर रात एक बजे तक सलीम भाटी के साथ ही था। इसके बाद सलीम ही उसे घर तक छोड़ कर गया। इस दौरान उनमें हुई बातचीत की कोई जानकारी परिजनों के पास नहीं है। शरीफ ने बताया कि जांच अधिकारी ने जावेद की प|ी व उसके बयान दर्ज किए हैं। जावेद की प|ी कौसर बानो ने अपने बयान में पुलिस को सलीम भाटी और रणवीरसिंह के नाम बताए हैं। ये लोग उसके पति पर पैसों का दबाव बना रहे थे। सूत्रों के अनुसार मृतक के परिवार पर सूदखोर अब भी दबाव बना रहे हैं कि वह उनके नामों का खुलासा नहीं करें। इसलिए परिवार दहशत में है। कोतवाल महावीरसिंह राठौड़ ने बताया कि जावेद प्रकरण में पुलिस का अनुसंधान चल रहा है। इसके कारण से अब तक हुई जांच के बारे में नहीं बताया जा सकता है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

सवाल | आखिर पुलिस क्यों बचा रही है सूदखोरों को?
तीन दिन बाद भी नहीं खोली दुकान : मृतक के भाई शरीफ ने शनिवार को जांच अधिकारी को फोन कर गोकुलपुरा की दुकान की तलाशी लेने की बात कही। लेकिन, जांच अधिकारी धनसिंह ने व्यस्तता बताते हुए शनिवार को जांच नहीं करने की बात कहीं।

अनजान व्यक्ति की नहीं की तलाश | शरीफ ने बताया कि जावेद के आत्महत्या करने से पहले उसी रोज एक व्यक्ति जावेद से मिलने घर आया। जावेद और उस व्यक्ति के बीच कमेरे में करीब 10 मिनट बातचीत हुई। इसके बाद वह व्यक्ति चला गया।

सलीम और रणवीर से नहीं की पूछताछ | पुलिस पूछताछ में मृतका की प|ी ने सूदखोर सलीम भाटी और रणवीर का नाम बताया।, लेकिन पुलिस उनसे पूछताछ नहीं कर रही है। चर्चा है कि उनमें से एक सूदखोर भागने की फिराक में है।

सूदखोरों का बैकग्राउंड
सलीम भाटी | सूदखोरों के बीच यह बड़ा नाम है। मक्का मस्जिद के पास रहने वाला सलीम भाटी 25 साल पहले टैंट हाउस का काम करता था। इसके बाद एक राजनेता के साथ प्रोपर्टी कारोबार किया। इसका सूदखोरी का कारोबार मुंबई तक फैला हुआ है। पूर्व में महिला से मकान हड़पने और कब्जा करने को लेकर इसके खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है।

रणवीरसिंह | यह भी सूदखोरी के नेटवर्क का हिस्सा है। इस काम में उतरने से पहले यह ऑटो चलाता था। शीतला चौक के पास एक ऑफिस में बैठता है। सूदखोरी के मामले में इसके खिलाफ पूर्व में शहर कोतवाली में मामला दर्ज हो चुका है।

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