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एक सीएचसी व 22 पीएचसी में सालभर में नहीं हुआ एक भी प्रसव, डॉक्टर्स की कमी बड़ी वजह

3 वर्ष पहले
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संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने भले ही विभिन्न योजनाएं शुरू की हों, लेकिन जिले के सरकारी अस्पतालों में ये बेअसर है। जिले के सरकारी अस्पतालों में संसाधनों व डॉक्टरों की भारी कमी है। इसके कारण जिले के दो दर्जन अस्पतालों में पूरे साल में भी एक भी प्रसव नहीं हो पाया। सरकारी आंकड़ों को देखें तो जिले के 23 सरकारी अस्पतालों में वर्ष 2017-18 में एक भी प्रसव नहीं हुआ। वहीं 56 अस्पतालों में साल में 10 से भी कम प्रसव हो पाए। अस्पतालों की इस स्थिति को लेकर यहां सुविधाओं व डॉक्टर्स की कमी मुख्य वजह है। जिले के सरकारी अस्पतालों की खराब स्थिति का परिणाम ये हुआ कि जिले में कुल संस्थागत प्रसव सरकारी अस्पतालों से अधिक निजी अस्पतालों में हो गया। जिले में 2017-18 में 45149 प्रसव हुए। इसमें से 24819 निजी अस्पतालों में हुए। वहीं सरकारी अस्पतालों में 20330 हो पाए।

जिले की इन सीएचसी व पीएससी में नहीं हुआ प्रसव

जिले के एक सीएचसी व 22 पीएससी में वित्त वर्ष 2017-18 में एक भी प्रसव नहीं हुआ। इनमें मऊ सीएचसी के साथ बाटड़ानाउ, बीबीपुर बड़ा, बिराणियां, गारिंडा, हरसावा बड़ा, क्यामसर, पालड़ी, सुठोठ, सुतोद, कुंडलपुरा, बेरी, लामियां, हांसपुर, लिसाड़िया, सरगोठ, भादवाड़ी, हाथीदेह, नीमेड़ा, ठीकरिया, भागोठ, दीपावास, डोकन, प्रीतमपुरी पीएचसी शामिल हैं।

जिले में सीएचसी व पीएचसी में संसाधनों की कमी है। कई जगह जरूरी स्टाफ की कमी तो कई जगह जरूरी संसाधन नहीं हैं। जिले में सभी जगह प्रसव कराए जा सकें, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। निर्मल सिंह, आरसीएचओ, सीकर

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