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एसके अस्पताल की शर्मनाक तस्वीर

3 वर्ष पहले
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लापरवाही की यह तस्वीर एसके अस्पताल की है। पुरुष बर्न वार्ड में ही महिलाओं को रखकर इलाज किया जा रहा है। गंभीर इसलिए है, क्योंकि-जली हुई महिलाओं की ड्रेसिंग पुरुषों के सामने करना और रखना बेहद ही शर्मनाक है। बर्न वार्ड में बेटी सुशीला का इलाज करवा रही अंबेडकर नगर (सीकर) की बनारसी देवी व भगवान कुमार ने बताया कि डेढ़ महीने पहले चाय बनाते समय गैस सिलेंडर फटने से सुशीला चपेट में आ गई थी। उसके बाद एसके अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भर्ती के 15 दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन स्थिति सही नहीं हुई तो 10 दिन पहले दोबारा भर्ती कराना पड़ा। अब दो दिन पहले ही महिला बर्न वार्ड से हटाकर पुरुष वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। सुशीला 40 फीसदी जली हुई है। पीएमओ डॉ. एसके शर्मा का कहना है कि कुपोषित बच्चों के वार्ड को जनाना अस्पताल में शिफ्ट करना था, लेकिन वहां जगह नहीं है। नई बिल्डिंग बनने तक यह व्यवस्था की गई है। कमेटी का निर्णय है।

जली हुई महिला को पुरुष बर्न वार्ड में किया भर्ती, यहीं कर रहे इलाज, महिला वार्ड में कुपोषित बच्चों को शिफ्ट कर दिया

सीकर. एसके हॉस्पिटल का बर्न वार्ड।

प्रभारी ने माना-इस व्यवस्था से इलाज करने में परेशानी

एसके अस्पताल में महिलाओं के लिए बर्न वार्ड अलग से था, लेकिन इसमें कुपोषित बच्चों को शिफ्ट कर दिया गया। इसमें करीब दस बच्चे भर्ती है। अस्पताल का पक्ष है कि मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र की जगह मेडिकल कॉलेज के लिए बिल्डिंग बनेगी। इसलिए बच्चों को महिला बर्न वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। मामले को लेकर बर्न वार्ड के प्रभारी भगवानाराम ने बताया कि बर्न वार्ड में महिला व पुरुषों को एक साथ इलाज कराने में समस्याएं होती हैं। यहां महिला बर्न वार्ड में बुधवार को मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र के बच्चों को शिफ्ट किया गया है।

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