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कर्नाटक की राजनीति पर फेल हुई सीकर कांग्रेस ‘लोकतंत्र बचाओ दिवस’ में नहीं कर पाए प्रदर्शन

3 वर्ष पहले
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कर्नाटक में बहुमत से दूर रहने के बावजूद भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता देने और येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री की शपथ दिलाने पर कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में लोकतंत्र बचाओ दिवस मनाकर विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन सीकर में कांग्रेस की ओर से कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया गया, जबकि पड़ोसी जिले झुंझुनूं विरोध प्रदर्शन हुआ। पीएस जाट को कांग्रेस जिलाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद दिल्ली हाईकमान की ओर से यह पहला कार्यक्रम जारी किया गया था।विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस जमीनी स्तर पर इसमें कमजोर साबित हो रही है। फिर चाहे बात बिजली की बढ़ी दरें वापस लेने की हो या किसानों के लिए कर्ज माफी की घोषणा। दोनों ही बड़े मामलों में अखिल भारतीय किसान सभा ने बाजी मारी। हालांकि कांग्रेसी नेताओं का दावा है कि बिजली और कर्ज माफी के मामले उनकी ओर से ही उठाए गए थे। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस बड़े मामलों में भी जनता को नहीं जोड़ पाई। अब एक बार फिर विरोध प्रदर्शन का मौका सीकर नेताओं के हाथ से निकल गया। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष पीएस जाट के पद ग्रहण समारोह में जिले के सभी दिग्गज नेताओं ने विश्वास दिलाया था कि पार्टी को मजबूत बनाने में सब लोग एकजुट होकर काम करेंगे। यहां तक कि आर्थिक स्तर पर मदद के लिए बैंक खाता खुलवाने का सुझाव भी नेताओं ने दिया था।

क्या कांग्रेस में नए जिलाध्यक्ष काे फेल साबित करने साजिश है

राष्ट्रव्यापी आह्वान के बावजूद सीकर में विरोध प्रदर्शन नहीं होने के कारण सीकर कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं। क्या चुनाव से पहले नए जिलाध्यक्ष को फेल साबित करने की कोशिश हो रही है या गुटबाजी हावी हो रही है। क्योंकि पद ग्रहण समारोह में कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भाषण के दौरान इशारा किया था कि नियुक्ति के बाद जिलाध्यक्ष जाट के पहली बार सीकर आने पर उन्हें बुलाया नहीं गया। सूचना की जाती तो वे जरूर आते। ऐसे में नेताओं के बीच दूरियां नजर आने लगी हैं।

चुनाव से पहले हावी हो रही है गुटबाजी | भाजपा के बाद अब कांग्रेस में भी गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति कुछ नेताओं को रास नहीं आ रही। पूर्व में जिलाध्यक्ष के लिए पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व विधायक नारायणसिंह के बेटे वीरेंद्रसिंह का नाम सबसे ऊपर था। एक बारगी पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया सहित दूसरे नामों पर लॉबिंग हुई, लेकिन सहमति नहीं बनी तो हाईकमान ने पीएस जाट के नाम पर मुहर लगा दी। इससे गुटबाजी के स्वर उठे हैं।

मुझे जयपुर में होने वाले विरोध प्रदर्शन के लिए बुलाया गया था। जिलास्तर पर कार्यक्रम की सूचना प्रदेश स्तर से नहीं मिली। संभवतया जिलाध्यक्ष बदले जाने के बाद प्रदेश कार्यालय में फोन नंबर आदि की सूचना अपडेट नहीं होने के कारण सूचना नहीं मिल पाई। पीएस जाट, कांग्रेस जिलाध्यक्ष

भास्कर संवाददाता | सीकर

कर्नाटक में बहुमत से दूर रहने के बावजूद भाजपा को सरकार बनाने का न्यौता देने और येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री की शपथ दिलाने पर कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में लोकतंत्र बचाओ दिवस मनाकर विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन सीकर में कांग्रेस की ओर से कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया गया, जबकि पड़ोसी जिले झुंझुनूं विरोध प्रदर्शन हुआ। पीएस जाट को कांग्रेस जिलाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के बाद दिल्ली हाईकमान की ओर से यह पहला कार्यक्रम जारी किया गया था।विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस जमीनी स्तर पर इसमें कमजोर साबित हो रही है। फिर चाहे बात बिजली की बढ़ी दरें वापस लेने की हो या किसानों के लिए कर्ज माफी की घोषणा। दोनों ही बड़े मामलों में अखिल भारतीय किसान सभा ने बाजी मारी। हालांकि कांग्रेसी नेताओं का दावा है कि बिजली और कर्ज माफी के मामले उनकी ओर से ही उठाए गए थे। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस बड़े मामलों में भी जनता को नहीं जोड़ पाई। अब एक बार फिर विरोध प्रदर्शन का मौका सीकर नेताओं के हाथ से निकल गया। नवनियुक्त जिलाध्यक्ष पीएस जाट के पद ग्रहण समारोह में जिले के सभी दिग्गज नेताओं ने विश्वास दिलाया था कि पार्टी को मजबूत बनाने में सब लोग एकजुट होकर काम करेंगे। यहां तक कि आर्थिक स्तर पर मदद के लिए बैंक खाता खुलवाने का सुझाव भी नेताओं ने दिया था।

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