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झूठी रिपोर्ट- मरीजों के काम आ रहे हैं 8 वेंटिलेटर हकीकत- 10 साल में एक बार भी इस्तेमाल नहीं

3 वर्ष पहले
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एसके अस्पताल में तमाम उपकरण होने के बावजूद गंभीर मरीजों के इलाज में उनका उपयोग नहीं किया जा रहा है। ट्रोमा सहित आठ वेंटिलेटर है, लेकिन एक भी काम नहीं लिया जा रहा है, जबकि अस्पताल प्रशासन ने स्वास्थ्य निदेशक को इसकी झूठी रिपोर्ट तक बनाकर भेज दी। रिपोर्ट में बताया गया कि सभी वेंटिलेटर चालू हंै और काम लिए जा रहे हैं। जबकि हर महीने औसतन 125 ऐसे मरीजों को रैफर कर दिया जाता है, जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत होती है। परिजनों को इन्हें निजी अस्पताल या जयपुर एसएमएस तक ले जाना पड़ता है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. वीके माथुर ने सात मई 2018 को सीएमएचओ और पीएमओ को पत्र जारी कर वेंटिलेटर को लेकर रिपोर्ट मांगी थी। पूछा गया था कि अस्पताल में कितने वेंटिलेटर हैं और इनमें कितने चालू हैं। क्योंकि निरीक्षण में सामने आया कि अस्पताल वेंटिलेटर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। ऐसे में काम नहीं आ रहे वेंटिलेटर को दूसरे अस्पतालों को अलॉट किए जाने की योजना है। एसके अस्पताल पीएमओ डॉ. एसके शर्मा ने इस संबंध में झूठी रिपोर्ट स्वास्थ्य निदेशक को भिजवा दी। रिपोर्ट में में 8 वेंटिलेटर बताए गए और सभी चालू स्थिति में है। इन्हें मरीजों के इलाज में काम लिया जा रहा है। ट्रोमा में 10 साल में एक बार भी वेंटिलेटर का इस्तेमाल नहीं किया गया। स्वास्थ्य निदेशक द्वारा रिपोर्ट मांगी जाने पर करीब पांच दिन पहले अस्पताल प्रशासन ने ट्रोमा के दोनों वेंटिलेटर ट्रोमा के ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर दिए।

एसके में पड़ा वेंटिलेटर।

ट्रोमा सेंटर में 2008 में लगे थे दो वेंटिलेटर, आज तक काम नहीं आए

10 साल पहले 2008 में ट्रोमा सेंटर चालू किया था। ट्रोमा सेंटर में गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों के इलाज के लिए 2 वेंटिलेटर लगवाए थे। दोनों वेंटिलेटर आज तक काम नहीं आए। एक भी मरीज को वेंटिलेटर पर नहीं लिया गया। ट्रोमा पहुंचने वाले को मरीजों को न्यूरोसर्जन समेत स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी बताकर जयपुर रैफर कर दिया जाता है। अस्पताल से हर महीने 125 से ज्यादा मरीजों का रैफर किया जा रहा है। जिन्हें वेंटिलेटर की जरूरत होती है। इसी तरह आईसीयू में शुरूआत में वेंटिलेटर चालू रखने के बाद उसे भी बंद कर दिया गया। आईसीयू का वेंटिलेटर भी मरीजों के काम नहीं आ रहा है। जनाना अस्पताल में इन्हें काम नहीं लिया जा रहा।

निजी अस्पताल में मरीज को हर दिन खर्च करने पड़ते हैं 10 हजार रुपए | एसके अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीजों को निजी अस्पताल जाना पड़ता है। यहां वेंटिलेटर के लिए हर दिन 10 हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। डाक्टरों के मुताबिक जब मरीज का शरीर शिथिल हो जाता है। उसके कई अंग जो शरीर में ऑक्सीजन लेने और निकालने का काम करते है वो काम करना बंद कर देते है। तब वेंटिलेटर का प्रयोग किया जाता है। वेंटिलेटर लंग्स में ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है। वहीं शरीर से कार्बन डाई ऑक्साइड जो शरीर के लिए जहर का काम करती है उसे मरीज के शरीर से बाहर निकालता है। मरीज को सांस लेने में सहायता करता है। एक वेंटिलेटर मशीन की कीमत करीब 10 लाख रुपए आती है।

वेंटिलेटर है और वे मरीजों के इलाज में काम नहीं आ रहे तो गंभीर मामला है। मैं पीएमओ से बात कर वेंटिलेटर चालू करवाऊंगा। उन्होंने अगर झूठी रिपोर्ट भेजी है तो इस जानकारी ली जाएगी। - डॉ. गोवर्धन मीना, प्रिंसिपल मेडिकल कॉलेज, सीकर

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