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सहज फॉर्म में बताना होगा, किराए से कितनी आमदनी हुई, कितना टैक्स भरा

3 वर्ष पहले
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मकान, जमीन और दुकान किराए पर देकर उनसे कमाई करने वालों पर आयकर विभाग की निगाह है। आयकर विभाग के सर्वे में किराए के रूप में मोटी कमाई करने और आयकर विभाग को जानकारी नहीं देने की बात सामने आई थी। उसके बाद विभाग ने 2018-19 (वित्त वर्ष 2017-18) के आयकर रिटर्न फार्म में इस बार व्यक्तिगत करदाताओं से मकान, दुकान और जमीन से कमाई का पूरा हिसाब देने को कहा है। आयकर रिटर्न में उन्हें किराए के रूप में मकान से कमाई और उस पर स्थानीय निकाय को दिए गए टैक्स की जानकारी भी देनी होगी।

सूत्रों के अनुसार पहले किराए से होने वाली आय के बारे में आयकर रिटर्न फाॅर्म आईटीआर-2 में हिसाब लिया जाता था, लेकिन इस बार इसे आईटीआर-1 में भी यह जानकारी देनी पड़ेगी। अगर किसी करदाता ने अपना मकान किराए पर उठाया है तो उसे आयकर रिटर्न में किराए से आमदनी के बारे में जानकारी तो देनी ही होगी। इसके साथ उन्हें मकान खरीदने या बनाने के लिए आमदनी व स्त्रोत का का ब्यौरा भी रिटर्न में देना होगा। इस बार “सहज” फार्म में एक नया बिंदु और जोड़ा है। इसके तहत करदाता ने अगर अपना मकान किराए पर उठाया है तो काटे गए टीडीएस का ब्यौरा भी देना होगा। अब तक आयकर रिटर्न में यह कॉलम नहीं था। आयकर विभाग के सामने आया है कि बहुत से लोग मकान से आय को आयकर विभाग से छिपाते हैं। इसलिए विभाग न सिर्फ किराए से होने वाली आय के बारे में ब्यौरा जुटा रहा है, बल्कि इस बात की जानकारी भी जुटा रहा है कि मकान पर कितना टैक्स स्थानीय निकाय को दिया गया। असेसमेंट 2018-19 के लिए आयकर रिटर्न फार्म में पिछले साल की तुलना में कई बदलाव किए गए हैं।

इनकम टैक्स रिटर्न में पहले भी किराए से होने वाली आय की जानकारी का कॉलम था। लेकिन इस बार इसे अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। जिसमें किराए से होने वाली आय समेत सारी जानकारी देनी पड़ेगी। सुनील मोर, सीए, सीकर।

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