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स्मृति वन में ड्रिप से होगी पौधों की सिंचाई, रोज बचेगा 3.5 लाख लीटर पानी

3 वर्ष पहले
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स्मृति वन में पौधों की सुचारू सिंचाई व्यवस्था के लिए 16 लाख रुपए के बजट से ड्रिप सिस्टम लगाया जा रहा है। अगले महीने 100 हैक्टेयर में लगे 75 हजार पौधों को ड्रिप सिस्टम से पानी मिलने लगेगा। ड्रिप के जरिए पानी सीधे पौधों की जड़ों में पहुंचने से 75 फीसदी पानी की बचत होगी। यहां हर दिन 3.50 लाख लीटर पानी की बचत होगी। फिलहाल यहां टैंकरों के जरिए हर दिन 4.80 लाख लीटर पानी पेड़ों में डाला जाता है। ड्रिप सिंचाई से महज 1.30 लाख लीटर पानी से पौधों की सिंचाई हो जाएगी।

स्मृति वन में पौधों में पानी डालने के लिए करीब एक दर्जन टैंकर लगा रखे हैं। सुबह छह बजे से पौधों को पानी डालना शुरू किया जाता है। जो देर रात तक चलता है। समय, पैसा और पानी की बचत करने के लिए स्मृति वन में ड्रिप सिस्टम लगाया जा रहा है। डीएफओ राजेंद्र हुड्डा ने बताया कि ड्रिप सिस्टम को स्मृति वन में तैयार कराई जा रही पानी की टंकी और अन्य पाइप को ट्यूबवैल से जोड़ा जाएगा। इस सिस्टम को इस तरह से तैयार किया जा रहा है कि जरूरत के मुताबिक ही पानी पौधो में दिया जाएगा। ड्रिप सिस्टम में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी को भी उपयोग में किया जाएगा। इस प्लांट में दस लाख रुपए की कीमत से पाइप, चार लाख रुपए सिस्टम और एक लाख रुपए की मजदूरी के साथ इसे सेटअप किया जा रहा है।

ड्रिप सिस्टम पर खर्च होंगे 16 लाख रुपए, सौ हैक्टेयर में फैले स्मृति वन में फिलहाल ट्रेकरों से होती हैं पौधों की सिंचाई

यूं समझे पैसे और समय के बचत का गणित

विभाग द्वारा एक टैंकर पर 400 रुपए दिए जाते है। एक टैंकर में करीब पांच हजार लीटर पानी आता हैं जो 250 पौधों में डाला जाता है। स्मृति वन में एक दर्जन टैंकर रोजाना करीब 80 चक्करों के जरिए 20 हजार पौधों को ही पानी डाल पाते हैं। यहां 75 हजार पौधे लगे हुए है। रोजाना पानी डाला जाए तो भी एक पौधे को सात दिन बाद ही पानी मिल पाता है। ऐसे में ट्रैकर व्यवस्था पर हर महीने 30 हजार रुपए खर्च आता है। ड्रिप सिस्टम से यह पैसा बचाया जा सकेगा।

बचने वाले पानी से पांच हजार लोगों हो सकती है आपूर्ति | ड्रिप सिस्टम के कारण हर दिन बचने वाले साढे तीन लाख लीटर पानी से पांच हजार लोगों को पेयजल आपूर्ति की जा सकती है। जलदाय विभाग के मुताबिक औसतन एक व्यक्ति को नियमित दिनचर्या के लिए करीब 70 लीटर पानी की जरुरत होती है। ऐसे में इस पानी से पांच हजार परिवारों की जरुरत पूरी हो सकती है।

एक्सपर्ट व्यू : 75 फीसदी पानी की होगी बचत

ड्रिप इरिगेशन के जानकार पूर्व आईएएस शासन सचिव हॉर्टिकल्चर विभाग डा. आरएस गिठाला के अनुसार ड्रिप सिस्टम से पानी सीधे पौधे की जड़ों तक पहुंचता है। गर्मी के दिनों में पेड़ के सोखने से पहले ही वह पानी वाष्प के साथ सूख जाता है। जिससे पेड़ पौधों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पाता है। राजस्थान में अभी तक लगे सभी सिस्टम के आधार पर 75 प्रतिशत तक पानी की बचत हो रही है।

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