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महिला सुपरवाइजर के पद खाली होने के कारण एक को ही दे दिया चार-चार सेक्टर का चार्ज

3 वर्ष पहले
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जिले में आंगनबाड़ी केन्द्रों की मॉनिटरिंग करने वाली कई महिला सुपरवाइजरों के पास चार-चार सेक्टर की जिम्मेदारी है। इनमें से कई महिला सुपरवाइजरों को हर महीने 120 से ज्यादा आंगनबाड़ियों का निरीक्षण करना है। महिला सुपरवाइजरों के जिले में 21 पद रिक्त चल रहे हैं। इसके कारण आंगनबाड़ी केन्द्रों में वितरित होने वाले पोषाहार, गर्भवतियों व बच्चों से जुड़ी विभिन्न योजनाएं प्रभावित हो रही हंै।

एलएस न होने से आंगनबाड़ियों का समय पर निरीक्षण नहीं हो रहा है और न ही विभिन्न योजनाओं की मॉनिटरिंग हो रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने कई महिला सुपरवाइजरों को एक साथ दो-दो सेक्टर का काम दिया है। कई महिला सुपरवाइजरों के पास 60 आंगनबाड़ी केन्द्र हो गए हैं।

वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिले में 2143 आंगनबाड़ी केन्द्रों चल रहे हैं। जिले में महिला सुपरवाइजर के 21 पद काफी समय से खाली पड़े हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग के उपनिदेशक राजेंद्र चौधरी का कहना है कि पद रिक्त होने से कई एलएस को एक्सट्रा चार्ज दिया है। हर महीने निरीक्षण नहीं हो रहा है। दूसरा विकल्प नहीं है। हर सेक्टर के लिए एक महिला सुपरवाइजर होने का नियम है।

एक एलएस को देते हैं 30 आंगनबाड़ी केंद्र

महिला सुपरवाइजर 25 से 30 आंगनबाड़ी दी जाती है। निरीक्षण की जिम्मेदारी एनएस की होती है। महिला सुपरवाइजर आंगनबाड़ी में तैनात कर्मचारियों, आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों को मिलने वाले पोषाहार, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की रिपोर्ट सीडीपीओ को देती है। हर महीने प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र का निरीक्षण का नियम है, लेकिन आंगनबाड़ी केन्द्र का समय पर निरीक्षण नहीं होने से कागजों में निरीक्षण दिखाया जा रहा है। वहीं, योजनाओं को लेकर भी पूरी मॉनिटरिंग नहीं हो रही है। पोषाहार भुगतान के मामलों की जांच भी नहीं हो पा रही है।

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