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सिकराय में किराए की जमीन पर सब्जियों की खेती, दिल्ली व पंजाब की मंडियों से मुनाफा कमा रहे हैं उत्तरप्रदेश के किसान
तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में किराए की भूमि पर दूसरे प्रदेश से आकर खेती करने वाले किसानों की मेहनत अब रंग लाने लगी है। खेतों में सब्जियों की पैदावार शुरू हो गई है। जिनकों पैक करने के बाद दिल्ली, हरियाणा, पंजाब की सब्जी मंडियों में भिजवाया जा रहा है। सब्जियों के अतिरिक्त तरबूज-खरबूजे की बंपर पैदावार होने से किसानों को बाहर की मंडियों से अच्छा मुनाफा मिल रहा है।
उत्तरप्रदेश के किसान यहां के गांवों में किराए की भूमि लेकर लौकी, करेले, खीरा, कद्दू, तुरई, ककड़ी, तरबूज व खरबूजे की फसल तैयार करते हैं। नवंबर से लेकर दिसबंर तक फसल बुआई का काम जोरों पर चलता है। किसान सर्दी व पाले से बचाव के लिए भी काफी इंतजाम करते हैं। मार्च-अप्रैल में सब्जियों व तरबूज-खरबूजे की पैदावार शुरू हो जाती है। किसान श्रमिकों की सहायता से सब्जियों की पैकिंग करवाकर अन्य प्रदेशों की सब्जी मंडियों में भिजवाते हैं, जिससे यहां की बजाय अधिक मुनाफा मिलता है।
तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों में किराए पर जमीन लेकर करते हैं खेती, जलस्तर गहराने से स्थानीय किसानों का भी बढ़ा रुझान
सिकराय. किराए की भूमि पर तैयार सब्जियों की पैकिंग करता मजदूर।
प्रतिदिन भिजवाते हैं सब्जियां : ग्रामीण क्षेत्रों में फसल तैयारी में जुटे किसानों व श्रमिकों ने बताया कि खेतों में तैयार होने वाले सब्जियों को प्रतिदिन ट्रकों की सहायता से अन्य प्रदेशों में लगने वाली मंडियों में भिजवाया जाता है। उन्होंने बताया कि यहां तैयार होने वाली फसल की दिल्ली, पंजाब व हरियाणा में अधिक डिमांड रहती है। स्थानीय मंडियों में भी सब्जियां भेजी जाती है। लेकिन मुनाफा कम मिलता है।
15 से 20 हजार रुपए बीघा में किराए पर लेते हैं भूमि : बाहर से आकर सब्जी व तरबूज-खरबूजे की फसल तैयार करने वाले किसान स्थानीय किसानों से 15 से 20 हजार रुपए बीघा के हिसाब से भूमि किराए पर लेकर फसल तैयार करते हैं। सिकराय क्षेत्र के विभिन्न गांवों में किसानों ने सैकड़ों बीघा किराए की भूमि पर तैयार की गई सब्जियों एवं तरबूज-खरबूजे की बंपर पैदावार से किसानों को मुनाफा मिल रहा है।
स्थानीय महिलाओं को भी मिलता है रोजगार : किराए की भूमि पर तैयार की जा रही सब्जियों की फसलों में बिहार व बंगाल के श्रमिक काम करते हैं, जिनकों किसानों के द्वारा सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती है। इनके अतिरिक्त पैदावार शुरू होने पर स्थानीय श्रमिकों को भी रोजगार मिल जाता है। जिन्हें सब्जी तोड़ने के बाद पैकिंग के लिए दिहाड़ी के हिसाब से काम मिल जाता है। जैसे-जैसे जलस्तर गहराता जा रहा है। वैसे-वैसे स्थानीय किसानों को गेहूं की फसल में नियमिति सिंचाई के लिए पानी की कमी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इससे किसानों ने जमीन किराए पर देना शुरू कर दिया है।