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रमजान के पहले जुमे पर मस्जिदों में रही भीड़

3 वर्ष पहले
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रहमतों, बरकतों, नेकियाें व नेमतों का माह रमजान के आगाज के साथ ही नगर की मस्जिदों में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोगों का पहुंचना प्रारंभ हो गया है। बीते कई दिनों से रमजान माह को लेकर मुस्लिम समाज के द्वारा तैयारियां की जा रही थी।

मुस्लिम धर्म के पवित्र रमजान माह के दूसरे दिवस शुक्रवार को प्रथम जुमे की नमाज मस्जिदों में मुस्लिम धर्मावलंबियों के द्वारा अदा की गई। इस्लाम धर्म में रमजान माह को रहमतों, बरकतों, नेकियाें व नेमतों का माह कहा जाता है। समाज बंधु रोज रखकर अल्लाह की इबादत करते हैं। एक माह तक मुस्लिम अल्लाह की इबादत में लीन रहेंगे। नगर में स्थित 12 से अधिक मस्जिदों में मुस्लिम धर्मावलंबी रमजान माह के दौरान पांचों वक्त की नमाज अता करेंगे, इसे लेकर विशेष इंतजामात किए गए है।

रमजान माह का द्वितीय रोजा शुक्रवार को मुस्लिमों के द्वारा रखा गया। तय समय शाम को घरों में सामूहिक रुप से अफ्तारी की गई। रमजान प्रारंभ होने के साथ ही नगर की मस्जिदों में तरावीह का पाठ भी प्रारंभ हो गया है। रमजान माह प्रारंभ होने के साथ ही तरावीह की नमाज नगर की मस्जिदों में शुरु हो गई है। । मुसलमान अल्लाह की रजा के लिए सूर्योदय के काफी पहले (सुबह-ए-सादिक) से लेकर सूरज के ढलने तक भूखे प्यासे रहते है और अल्लाह की इबादत करते है। सुबह-ए-सादिक के निर्धारित समय तक कुछ खा पी भी लेते है उसे सहरी कहा जाता हैं जबकि सूरज के ढलने के समय (मगरिब) इफ्तार करते है।

70 गुना बढ़ जाती है रोजेदारों की नेकियों

इस्लाम में पांच फर्ज अहम (महत्वपूर्ण) होते हैं। उसमें से एक है रोजा। रमजान का मकसद दूसरों की तकलीफ समझने व बुराइयों से तौबा करने का होता है। इस माह रोजेदारों की नेकी व इबादत का सिला 70 गुना बढ़ जाता हैं। अल्लाह ने रमजान की खुशी के रूप में अपने बंदों को ईद का तोहफा देते हैं।

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