माता पिता को भरण पोषण के रूप में प्रतिमाह 6-6 हजार रुपए की राशि दिए जाने के आदेश एसडीएम न्यायालय द्वारा दिया गया है। माता-पिता की कृषि भूमि और मकान पर उसके पुत्रों के द्वारा जबरन कब्जा कर लिया था। भरण पोषण के दो अलग अलग प्रकरणों में एसडीएम अनिल जैन के द्वारा फैसला सुनाया गया।
प्रथम प्रकरण में खैरी गांव निवासी रामचरण पुत्र छुटटा ने एसडीएम को आवेदन दिया था। जिसमें उल्लेख किया था कि उसकी कृषि भूमि और मकान पर उसके पुत्र गोवर्धन के द्वारा कब्जा कर लिया गया है व उसे घर से भी निकाल दिया गया है। वर्तमान में वह सिलवानी स्थित कांठिया मंदिर में रह रहा है चूंकि वृद्व होने के कारण वह स्वयं मजदूरी भी नहीं कर पाता है। फलस्वरूप खाने पीने के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
चार पुत्रों ने अपनी वृद्ध मां को घर से भगाया
एक अन्य प्रकरण में भी मां के भरण पोषण के लिए चार पुत्रों पर डेढ़ डेढ़ हजार रुपए प्रतिमाह भरण पोषण राशि दिए जाने का आदेश पारित किया गया। आवेदिका गोमतीबाई पति खुशी लाल यादव निवासी गांधी चौक सिलवानी के नाम की 4 एकड़ कृषि भूमि पटवारी हल्का नंबर 18 बेंगबाखुर्द गांव में है। भूमि उसके पुत्र नारायण, अशोक, मुन्ना और केशव के कब्जे में है। आवेदिका के अनुसार उसे दो वक्त की रोटी भी उसके पुत्रगण खाने को नहीं दे रहे है। और वह वृद्धावस्था में यहां वहां भटक रही है। प्रकरण की विवेचना के पश्चात एसडीएम के द्वारा पारित आदेश मे उल्लेख किया गया है कि विवेचना से स्पष्ट होता है कि आवेदिका के पास 4 एकड़ भूमि है जो कि उसके पुत्रों के कब्जे में है।
तहसीलदार भूूमि का कब्जा आवेदिका गोमती बाई को दिलवा कर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। कब्जा प्राप्त ना होने की स्थिति तक भरण पोषण तथा कल्याण अधिनियम के अनुसार आवेदिका गोमतीबाई के पुत्र नारायण, अशोक, मुन्ना व केशव प्रतिमाह 1500-1500 रुपए कुल 6 हजार रुपए की राशि आवेदिका को दी जाए ।
भरण पोषण के दोनों ही मामलों में आदेशित राशि नहीं दिए जाने पर वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा अथवा परित्याग मान कर संज्ञेय अपराध दर्ज कराया जाएगा
मामले में एसडीएम ने जारी किया नोटिस
आवेदक के आवेदन पर संज्ञान लेते हुए एसडीएम ने अनावेदक पुत्र गोवर्धन का नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई की। तत्पश्चात आदेश पारित किया गया। पारित आदेश में तहसीलदार को निर्देशित किया गया है कि वह मौके पर जाकर आवेदक की भूमि को कब्जे से मुक्त करा कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करे। जब तक भूमि पर से पुत्र का कब्जा नहीं हटता है तब तक पुत्र गोवर्धन अपने पिता को प्रति माह भरण भोषण के लिए 6 हजार रुपए गुजारा राशि दे।