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भगवान दर्शन से सुख व संसार देखने से दुख मिलता है

3 वर्ष पहले
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वर्तमान समय में मनुष्य पेट भरने के लिए जी रहा है। परिवार का पालन पोषण करने की भावना मन में विधमान हो जाने के कारण इंसान भगवान की स्तुति से विमुख होता जा रहा है। जो कि धर्म संस्कृति के अनुरूप नहीं हैं। प्रत्येक मानव को भगवान की स्तुति निस्वार्थ भाव से विधि अनुसार करनी चाहिए। ताकि जीवन सफल हो सकें।

यह उद्गार पंडित रामानुजाचार्य ने शुक्रवार को व्यक्त किए। वह सोजनी धाम में आयोजित श्रीराम कथा में कार्यक्रम में शामिल श्रद्धालु़ओं को भगवान की वाणी का रसा स्वादन करा रहे थे । सोजनी धाम में 51 कुं्डीय विराट श्रीराम महायज्ञ, संगीतमयी रामकथा, प्रवचन व रामलीला का आयोजन रामदास त्यागी महाराज के सानिध्य में किया जा रहा है। कथा वाचक पंडित रामानुजाचार्य ने बताया कि भगवान के दर्शन व स्तुति करने से मानव को सुख प्राप्त होता है, भगवान की प्रत्येक दिन स्तुति व दर्शन करने तथा अनुष्ठान किए जाने से इंसान के जीवन में समरसता आती है। किए जाने वाले कार्य सफल होते है। जबकि धार्मिक स्थलों से विमुख होने व भगवान की स्तुति नहीं करने वाले संसार की तरफ देखते है। एेसा करने वाले इंसान को प्रतिपल असफलता प्राप्त होती है। तथा किए जाने वाले कार्य बिगड़ जाते है। उन्होंने बताया कि लोग पश्चात जीवन शैली को अपना कर पशुवत जीवन जीने की तरफ कदम बढ़ा रहे है, ऐसा जीवन उचित नहीं है। जबकि मानव को चाहिए कि वह सद्मार्ग पर चले ताकि स्वयं के साथ ही परिवार के सदस्यों की भावना धर्ममय हो सके। आपने कहा कि शिखा हिंदु समाज की अमिट पहचान होती है। प्रत्येक हिंदु को शिखा रखना चाहिए।

धर्म

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५१ कुंडीय विराट श्रीराम महायज्ञ, संगीतमय रामकथा, प्रवचन व रामलीला का किया जा रहा है आयोजन

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सोजनीधाम में आयोजित कार्यक्रम में प्रवचन सुनती महिलाएं।

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