सेवा से ही सुख को प्राप्त किया जा सकता है
सिलवानी| इंद्रियों का जुड़ाव आत्मा से होने मे ही सुख प्राप्त होता है। जब तक पूर्ण रुप से इंद्रियों का जुड़ाव आत्मा से नहीं होगा तब तक सुख की अनुभूति नहीं की जा सकती है। अतः व्यक्ति को इंद्रियों को वश में रखकर आत्मा से जुड़ा होना चाहिए। यह उद्गार ब्रह्मचारी महाराज ने व्यक्त किए।
वह बम्होरी बर्धा गांव में आयोजित भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समारोह के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। ब्रह्मचारी महाराज ने बताया कि मानव इंद्रियों मे सुख देख रहा है, लेकिन सुख कहा है यह जानने का प्रयास नहीं कर रहा। इंसान को सुखी रहना है तो परिवार के सभी सदस्यों, मित्रों, सगे संबंधियों सहित प्रत्येक परिचित को सुख देने का प्रयास करना चाहिए। जब मानव दूसरों को सुख देने का प्रयास करेगा तब सुखी होने वाला व्यक्ति सुख देने वाले की दुआएं देगा। तब स्वतः ही व्यक्ति सुख को प्राप्त करेगा। ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि शास्त्रों का गहन अध्ययन करके उनका आचरण जीवन में हो। सुख चाहते हो तो किसी को दुख न दो तथा धर्म का आचरण जीवन में करो, जो इंसान धर्म का पालन नहीं करते हैं वह मूढ़ हैं। मूढ़ता को त्याग कर धर्म मय आचरण से जीवन यापन करना चाहिए। भागवत कथा के श्रवण से पापों का छरण होने लगता है। उन्होंने भागवत को मोक्षदायिनी कथा बताया।
ब्रह्मचारी महाराज ने बताया कि इच्छाएं अनंत हैं जो कि कभी पूर्ण नहीं होतीं। इच्छा पूर्ण न होने पर इंसान बौखलाहट में आ जाता है। क्रोधित हो जाता है और क्रोध में आते ही इंसान की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। जिसके कारण बना बनाया काम भी नष्ट हो जाता है। क्रोध व्यक्ति के ज्ञान का भक्षण करता है। बुद्धि और ज्ञान नष्ट होती ही जीवन भी समाप्त हो जाता है।
उन्होंने बताया कि जो भाग्य में नहीं है वह कभी भी नहीं मिल सकता। लेकिन आज कर्मों का लेखा जोखा बढ़ता ही जा रहा है। कर्मों से निजात पाने के दो मार्ग हैं जो लिया है उसे वापस कर दो। अंतिम दिन कथा सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सप्त दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन रमाकांत शुक्ला व परिजनों द्वारा कराया गया था।
धर्म
बम्होरी बर्धा गांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के समापन अवसर पर ब्रह्मचारी महाराज ने कहा
समापन पर कथा सुनने बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु।