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अस्पताल में स्टाफ की कमी से लोग हो रहे परेशान

3 वर्ष पहले
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प्रदेश सरकार तहसील मुख्यालयों से लेकर अंतिम छोर पर बसे गावों तक में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने का दावा कर रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का यह दावा विधानसभा व तहसील मुख्यालय पर दम तोड़ता नजर आ रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों व आवश्यक उपकरणों के न होने से मरीजों को उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है।

स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ ही वार्ड बाय ,फार्मासिस्ट सहित अनेक पद रिक्त पड़े हुए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 6 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में मात्र 4 चिकित्सक पदस्थ हैं। जबकि दो चिकित्सकों के पद खाली हैं। चिकित्सकों सहित स्वास्थ्य कर्मचारियों के स्वीकृत पदों पर नियुक्ति न होने के कारण मरीजों को परेशानी उठाना पड़ रही है।

प्रतिदिन आते हैं मरीज : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विभिन्न रोगों का उपचार कराए जाने के लिए प्रतिदिन तीन सौ के करीब मरीज आते हैं। आने वाले मरीजों का उपचार वर्तमान में पदस्थ चिकित्सकों द्वारा किया जाता है, लेकिन मरीजों को परेशानी उस समय हो जाती है जब तैनात चिकित्सकों में से कुछ अवकाश पर या विभागीय कार्य से अन्य स्थानों पर गए हों। ऐसी स्थिति में मरीजों का समय पर उपचार नहीं मिल पाता है।

अस्पताल भवन भी जर्जर : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उन्नयन कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा करीब 15 साल प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य महकमा के उच्च पदस्थ अधिकारियों द्वारा दिया गया था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का निर्माण नहीं कराया जा सका। उन्नयन के समय वार्ड व ओटी का ही निर्माण कराया गया था। बरसात में पानी टपकता है। रोगी कल्याण समिति की राशि से रंग रोगन किए जाने के साथ ही भवन में सुधार का कार्य कर भवन को व्यवस्थित किया जाना बताया जा रहा है।

मर्चूरी कक्ष भी होता जा रहा है क्षतिग्रस्त : कई सालों पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन निर्माण के साथ ही मर्चूरी कक्ष का निर्माण कार्य भी कराया गया था, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उन्नयन कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा दे दिया गया।

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