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रहमत व बरकतों का महीना है माह-ए-रमजान, सबके साथ अच्छा बर्ताव करें

3 वर्ष पहले
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मुस्लिम धर्मावलंबियों का पवित्र माह रमजानुल मुबारक के शुरू होते ही लोग इबादतों में जुट गए हैं। पाक माह के शुरू होते ही मस्जिदों में इशा नमाज के बाद पढ़े जाने वाले विशेष नमाज तराविह भी शुरू हो गई है। तराविह की नमाज में काफी संख्या में अकिदतमंद शामिल हो रहे हैं। रमजानुल मुबारक के पहले जुमे की नमाज शुक्रवार को शहर के सभी मस्जिदों में अदा की गई। जुमे की नमाज को लेकर मस्जिदों में खास इंतजाम किए गए थे। शहर के जामा मस्जिद, मदीना मस्जिद, मक्का मस्जिद,रजा मस्जिद, मस्जिद ए बेलाल, मस्जिद ए फातमतुजोहरा, नूर मस्जिद मेें काफी संख्या में नमाजी शामिल हुए। मक्का मस्जिद के इमाम मौलाना असीफुल्लाह ने नमाज अदा करने से पूर्व अपनी तकरीर में कहा कि साल के 12 महीनों में सबसे खास होता है रमजान का महीना। रमजान में रोजे रखे जाते हैं। रात में तराविह की नमाज पढ़ी जाती है। इस माह को अल्लाह के बरकतों, रहमतों, रोजा, तिलावत ए कुरान और तराविह की नमाज का कहा जाता है। मौलाना ने कहा कि इस माह में अल्लाह की तरफ से रहमत, बरकत बरसाई जाती है। मौलाना ने कहा कि सबके साथ अच्छा बरताव करने का संदेश मोहम्मद साहब ने दिया था। किसी के साथ नफरत न करने, एक दूसरे की मदद करने और मानवता के साथ पेश आने का भी संदेश मोहम्मद साहब का है। उन्होंने कहा कि रमजान में अगर मन में बुरे ख्यालात आएं तो इसे नेकी में बदल दें। इसका हमें शबाब मिलेगा। कयामत के दिन अल्लाह के सामने पेशी होगी। हिसाब किताब होगा तो उसमें रोजेदारों को माफ कर दिया जाएगा।

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