पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • छतीसगढ़ी का परिचायक होगी ‘छंद के बिरवा’

छतीसगढ़ी का परिचायक होगी ‘छंद के बिरवा’

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर न्यूज | ओटगन ( सिमगा )

छतीसगढ़ी साहित्य में चोवाराम वर्मा की पुस्तक ‘छन्द के बिरवा’ आने वाली पीढ़ी के लिए छत्तीसगढ़ी साहित्य जानने समझने के लिए आधार का काम करेगी। उक्त विचार संजीव तिवारी संपादक गुरतुर गोठ डॉट कॉम ने समीक्षा करते हुए कहा।

‘छंद के छह स्थापना दिवस के अवसर पर अंचल के साहित्यकार चोवाराम वर्मा बादल के छत्तीसगढ़ी पुस्तक छन्द के बिरवा की समीक्षा का भी आयोजन किया गया। साहू समाज सामुदायिक भवन में पुस्तक की समीक्षा करते हुए गुरतुर गोठ डॉट कॉम संपादक संजीव तिवारी ने कहा कि आने वाली पीढ़ी इंटरनेट में छत्तीसगढ़ी साहित्यकारों को पढ़कर हमारे साहित्य को जानेगी। इंटरनेट समुद्र के समान हैं। पुराने वरिष्ठ साहित्यकारों को वेब जानने वाले नहीं जानते। अब इंटरनेट का जमाना है। ट्यूटर के माध्यम से आपको विश्व जानने लगेगा। छत्तीसगढ साहित्य में छन्द के छ के संस्थापक अरुण निगम के योगदान छतीसगढ़ी साहित्य नहीं भूलेगा। इनके प्रयास से हमारी भाषा का व्याकरण जानने वाले 50 साहित्यकार हैं। धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती जाएगी। चोवाराम वर्मा के पुस्तक छन्द के बिरवा छत्तीसगढ़ी साहित्य का सचमुच में बिरवा साबित होगा। उसी तरह दुर्ग से आई साहित्यकार शकुंतला शर्मा ने समीक्षा करते हुए कहा कि वर्मा ने छन्द के द्वारा काव्य साहित्य लिखकर छत्तीसगढ़ी साहित्य को नया आयाम दिया है। समीक्षा के बाद राज्य भर से आये कवियों ने अपनी रचना पढ़ीं। समारोह में भागवत सोनकर अध्यक्ष नगर पंचायत सिमगा, नथमल झंवर वरिष्ठ साहित्यकार सिमगा, सूर्यकान्त गुप्ता दुर्ग, सपना निगम दुर्ग विशेष रूप से उपस्थित थे। मंच का संचालन अजय अमृतांशु ने किया।

समीक्षा

छन्द के छ स्थापना दिवस के राज्य स्तरीय साहित्य सम्मेलन में शामिल हुए कवि

छत्तीसगढ़ी पुस्तक छन्द के बिरवा की समीक्षा का आयोजन किया गया।

खबरें और भी हैं...