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अक्षय तृतीया पर 45 तपस्वियों का पारणा करवाया

3 वर्ष पहले
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शहर में जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ पेढ़ी की ओर से छह दिवसीय तृतीय सामूहिक वर्षीतप पारणा उत्सव के दूसरे दिन बुधवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर 45 तपस्वियों का धूमधाम से पारणा करवाया गया। इससे पहले शहर में तपस्वियों का वरघोड़ा निकाला गया। जिसमें समाज के लोगों ने उत्साह से भाग लिया। महोत्सव के तहत सवेरे गुरु भगवंतों की निश्रा में व्याख्यान का आयोजन किया गया।

जैन समाज के नितेश सिंघवी ने बताया कि महोत्सव के तहत बुधवार सवेरे तपस्वियों के पारणे कराने के लिए चढ़ावे बोले गए। जिसमें समाज के लोग उमड़ पड़े। इस दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए महावीर नवयुवक मंडल के सदस्यों ने अपनी टीम के अनुसार व्यवस्था संभाली। सवेरे 12 बजे 45 तपस्वियों का एक साथ जैन वीसी से वरघोड़ा निकाला गया। जो शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरा। वरघोड़ा महावीर नवयुवक मंडल के साथ गाजे-बाजे के साथ शहर के हस्तिनापुर नगरी स्थल पर पहुंचा, जहां 45 तपस्वियों के बैठने की अलग-अलग व्यवस्था की गई।

सिरोही. जैन समाज की ओर से शहर में तपस्वियों का वरघोड़ा निकाला गया। फोटो : भास्कर

पारणा करवाने उमड़े समाजबंधु, सांझीगीत का आयोजन

हस्तिनापुर नगरी में 45 तपस्वियों के पारणे के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। इस दौरान सभी तपस्वियों को बारी-बारी से सुख साता पूछी तथा पानी और गर्म पानी से पारणा करवाया गया। पारणा करवाने के लिए समाज के लोगों का तांता लगा रहा। इसके बाद सांझी गीत का भी आयोजन किया गया।

आदिनाथ मंदिर में रात को हुआ भक्ति कार्यक्रम

महोत्सव के तहत बुधवार रात को शहर के आदिनाथ मंदिर में भक्ति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर वहां मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं भक्ति संगीत से पूरा वातावरण भक्तिमय हो रहा था।

अक्षय तृतीया पर है पारणा करवाने का महत्व

जानकारी के अनुसार जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव भगवान ने 13 महीने का कठिन निरंतर उपवास (बिना जल का तप) का पारणा (उपवास छोड़ना) अक्षर तृतीया पर गन्ने के रस से किया था। इसलिए आज भी बहुत से जैन समाज के लोग वर्षीतप करने के बाद अक्षय तृतीया पर उपवास छोड़ते है और नये उपवास लेते है। साथ ही भगवान को गन्ने के रस से अभिषेक भी किया जाता है।

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