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पथराव किया तो पुलिस की नजर से बचना नामुमकिन

3 वर्ष पहले
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अब शहर या जिले के किसी गांव में भीड़ में उपद्रव और हुड़दंग मचाकर पुलिस की नजरों से बचना नामुमकिन होगा। दंगे, आगजनी और उपद्रव में पथराव करने वालों की पहचान होने में मुश्किल को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने अब सीसीटीवी लगे हुए हैलमेट खरीदे है। इन हेलमेटों को जल्द ही जिला मुख्यालयों पर उपलब्ध कराया जाएगा। इस हैलमेट को पहनकर पुलिस का जवान और अधिकारी आसानी से उपद्रवियों को अपने कैमरे में कैद कर लेंगे। शांति बहाली के बाद पुलिस फुटेज के आधार पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कर सकेगी। विदेशी तर्ज पर राजस्थान सरकार भी अपनी पुलिस को अपग्रेड करते हुए अत्याधुनिक साधन संसाधन उपलब्ध करा रही है। इस संबंध में 6 अप्रेल को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भी सभी एसपी को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए है। इस सुविधा से पहले पुलिस थानों को ऑनलाइन करने, थाना भवनों को सुधारने, संभाग और जिला मुख्यालय पर ड्रोन और सीसीटीवी उपलब्ध करा दिए गए है।

सुविधा मेडिकल किट और स्ट्रेचर भी देंगे

इधर, सरकार ने सड़क हादसों का ग्राफ कम करने के लिए संबंधित विभाग और पुलिस को निर्देश दिए है, कि वे दुर्घटना संभावित क्षेत्र को चिन्हित कर सुधारात्मक काम करें। पुलिस जवानों को घायलों को बचाने के लिए ट्रेनिंग देने के भी निर्देश दिए है। पुलिस मुख्यालय ने राज्य के सभी थाना पुलिस मेडिकल कीट के साथ साथ फोल्डिंग स्ट्रेचर भी उपलब्ध कराए जाएंगे । ताकि घायलों को एम्बुलेंस का इंतजार किए बगैर तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सके।

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तकनीक का उपयोग फायदेमंद

एसपी ओमप्रकाश ने बताया कि पुलिस विभाग में भी अब तकनीक का उपयोग होने लगा है। जीपीएस टैक्नोलॉजी से जुड़ने से तो लाइव घटनाक्रम की स्थिति का पता चलने लगेगा। कई बार दंगों उपद्रव और र्बवा की स्थिति आरोपियों की पहचान नहीं हो पाती। पुलिस को भी उन तक पहुंचने में काफी परेशानियां आती है। जगह-जगह जाकर पूछताछ और फुटेज खंगालने पड़ते है। ऐसे में इस तकनीक से कोई भी आरोपी पुलिस की नजर से नहीं बच पाएगा। फिलहाल पहले चरण में यह हेलमेट महकमे के अधिकारी जैसे पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपअधीक्षक रेंज के अधिकारियों को उपलब्ध होंगे। इसके बाद दूसरे चरण में इसे आगे बढ़ाया जाएगा।

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