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आज अक्षय तृतीया पर बन रहे हैं दुर्लभ योग, हर कार्य रहेगा अक्षय

3 वर्ष पहले
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वैशाख शुल्क तृतीया पर बुधवार को सर्वार्थ सिद्धि योग में अक्षय तृतीया (आखातीज) श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया पर किया गया कोई भी कार्य अक्षय रहता है और उसका 100 फल मिलता है। साथ ही अक्षय तृतीया को सोने के आभूषण खरीदने सहित जमीन, मकान, वाहन, वस्त्र आदि की गई खरीदारी के लिए भी अतिशुभ व फलदायी माना गया है। इस दिन किया गया दान, स्नान, जप, हवन, तर्पण, श्राद्ध का फल भी अक्षय रहेगा। इसके साथ ही नए संवत्सर का पहला व अबूझ सावा होने से विवाह, गृह प्रवेश, गृह आरंभ आदि शुभ व मांगलिक कार्य भी बिना मुहूर्त के किए जा सकेंगे।

पूरा दिन है खरीदारी के लिए श्रेष्ठ

ज्योतिषशास्त्री अशोक एम पंडित के अनुसार यूं तो अक्षय तृतीया का पूरा दिन ही शुभ कार्यों व खरीदारी के लिए श्रेष्ठ रहेगा। फिर भी इन मुहूर्तों में वस्तु विशेष की खरीदारी व शुभ कार्य करने से अक्षय फल मिलेगा। फिर भी जमीन, मकान, दुकान के लिए सुबह 8.15 से रात तक, आभूषण, वाहन, वस्त्र के लिए 10.51 से रात तक, सजावट, फर्नीचर के सुबह 11.15 से शाम 6.48 तक और इलेक्ट्रिक सामान, मशीनरी के लिए दोपहर 3.40 से शुभ मुहूर्त है।

अक्षय तृतीया

आभूषण, वाहन, जमीन, गृह आदि की खरीदारी के लिए अति उत्तम व शुभ दिन, घर में आएगी सुख समृद्धि

कृति का नक्षत्र रात 12.27 तक रहेगा, फिर रोहिणी नक्षत्र, कल रवि योग भी

सिरोही. आखातीज को लेकर बाजार में रौनक रही।

सूर्योदय से लेकर दिनभर सर्वार्थसिद्धि योग

सूर्योदय से लेकर दिनभर सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। कृति का नक्षत्र रात 12.27 तक रहेगा। फिर रोहिणी नक्षत्र आएगा। ये नक्षत्र लोगों के लिए खासा शुभ है। इसके साथ ही रात 12.27 से अगले दिन तक रवि योग भी रहेगा।

यह है विशेष महत्व

भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अज्ञातवास के दौरान अक्षयपात्र प्रदान किया था। वहीं, अक्षय तृतीया भगवान परशुराम के अवतरण की तिथि भी है। शास्त्रों के अनुसार इसी दिन त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। यह तिथि सदैव स्थायी रहती है। पंचांग में इसका कभी क्षय नहीं होता है। इस वजह से इसे ईश्वर की तिथि माना गया है। इसी दिन वृंदावन में बांकेबिहारीजी के चरणों दर्शन भी होंगे। सिर्फ इसी दिन भगवान विष्णु का अक्षत से पूजन होता है, अन्यथा विष्णु पूजन में अक्षत निषेध रहता है। इस दिन पंखा, चप्पल, सोना, चांदी, तांबा, छाता, गाय, कलश, जल से भरा बर्तन, स्वर्ण घड़ा, कुल्हड़ आदि मंदिर में दान किया जा सकता है।

आज से शनि होंगे वक्री

बुधवार को अक्षय तृतीया है और इसी दिन से शनि ग्रह भी वक्री हो रहा है। शनि का वक्री होना, यानी कि शनि की निश्चित चाल की गति धीमी हो जाना। रहेगा धनु राशि में ही, लेकिन दो कदम पीछे हो जाएगा और उसके अंश कम हो जाएंगे। इसका असर 12 राशियों के जातकों के ऊपर भी पड़ता है। इसकी राशि में शनि का असर है, वह राशि प्रभावित होगी।

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