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गर्मी के मौसम में सिर्फ होता था आराम और जमीन ऐसे ही पड़ी रहती थी, अब रोजाना 20 से 25 किलो टमाटर ले रही रेशमी

3 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | सिरोही (ग्रामीण)

आग उगलती जमीन और भीषण गर्मी के मौसम में लोगों को खेतों में काम करने के बजाए घर पर आराम करना अच्छा लगता है, लेकिन इस परंपरा को तोड़ा है डिंगार गांव की रेशमीदेवी गरासिया ने। पहले वह खुद भी गर्मी के मौसम में खेती करना मुनासिब नहीं समझती थीं, लेकिन इस आदिवासी महिला को जब प्रेरित किया तो फिर उसने पीछे नहीं मुड़कर नहीं देखा। रेशमीदेवी की इच्छा शक्ति देखिए, गांव में सीएमएफ और टाटा ट्रस्ट के सहयोग से सब्जी की खेती का काम शुरू किया। खेत पर 500 वर्गमीटर भूमि पर टमाटर की सब्जी की पैदावार का कार्य शुरू किया। करीब दो महीने गुजरने के बाद टमाटर की बम्पर आवक शुरू हुई। महिला ने पखवाड़े भर में ही साढ़े छह हजार रुपए के टमाटर बाजार बेच चुकी है। टमाटर की खेती से इस आदिवासी महिला को कुल 50 हजार रुपए से अधिक का मुनाफा होगा।

संयुक्त सचिव से लेकर स्थानीय अधिकारियों ने देखी खेती : तेलपुर ग्राम पंचायत के डिंगार गांव में ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार की संयुक्त सचिव अल्का उपाध्याय ने भी टमाटर की सब्जी देखी थीं। उन्होंने महिला से आय को बढ़ाने की योजनाओं को जाने के उद्देश्य के साथ खेतों में उगाई गई सब्जियों को देखा तथा इससे जुड़े बदलाव को जाना और समझा। इसी के साथ पूर्व कलेक्टर संदेश नायक के अलावा पिंडवाड़ा के अधिकारियों ने टमाटर की सब्जी को देखा। महिला टमाटर को तेलपुर, डिंगार, सिलवणी समेत आसपास के गांवों में वह टमाटर बेचने जाती है। इससे उसकी आय होती है।

जज्बा

डिंगार गांव की रेशमीदेवी गरासिया ने गर्मी के मौसम में खेती नहीं करने की परंपरा को बदला

प्रतिदिन 20 से 25 किलो टमाटर की पैदावार

रेशमीदेवी गरासिया ने खेत पर ड्रिप पद्धति से सब्जी का कार्य शुरू किया। बूंद-बूंद सिंचाई से खेत पर 1200 पौधे लगाए है। प्रतिदिन पौधों को आधे से पौने घंटे तक पानी पिलाया जाता है। प्रति प्लांट से अब पांच किलो टमाटर निकलते है। ऐसे में प्रतिदिन महिला पौधों से 20 से 25 किलो टमाटर ले रही है। महिला के खेत पर बोरवेल लगा हुआ है। प्लांट लगाए करीब ढाई महीने हो गए है।

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