भ्रूण लिंग जांच मामले की जांच अब 19 को
सरकूलर रोड पर स्थित गुप्ता अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भ्रूण लिंग जांच मामले की जांच के सिलसिले में दोनों पक्षों ने शुक्रवार को जांच अधिकारी हिसार के सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादयान के समक्ष पेश होकर अपना-अपना पक्ष रखना था। लेकिन जांच प्रक्रिया में शिकायतकर्ता शिल्पा वर्मा ही नहीं पहुंची। जबकि दूसरे पक्ष की ओर से सिरसा के तीनों सिविल सर्जन डॉ. विरेश भूषण, डॉ. राजेश चौधरी और डॉ. बुधराम निर्धारित समयानुसार पहुंचे। शिकायतकर्ता शिल्पा वर्मा की ओर से हिसार से उनके वकील पेश हुए और मामले की सुनवाई के लिए अन्य तारीख तय करने की अपील की। अपील में बताया गया कि शिकायतकर्ता को पथरी दर्द होने से वह जांच प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकती। जांच अधिकारी डॉ. कादयान ने मामले की आगामी सुनवाई 19 अप्रैल को करना सुनिश्चित कर दिया।
बता दें, एनजीओ परिवर्तन की चेयरपर्सन शिल्पा वर्मा एडवोकेट की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के डीजी (डायरेक्टर जनरल) ने जांच के आदेश जारी करते हुए हिसार के सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र कादयान को जांच करने के आदेश दिए। वैसे शिल्पा वर्मा ने इस मामले को लेकर कोर्ट में भी याचिका दायर की हुई है। शिल्पा वर्मा ने दी शिकायत में बताया कि गुप्ता अल्ट्रासाउंड सेंटर में हुए लिंग जांच मामले में 21 जनवरी को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा था। छापे के दौरान सिविल सर्जन डॉ. विरेश भूषण, डॉ. राजेश चौधरी और डॉ. बुधराम भी शामिल थे। लेकिन छापा मारने के बाद गुप्ता अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक डॉ. अशोक कुमार गुप्ता को बचाने का हरसंभव प्रयास किया जिसकी वजह से डॉ. गुप्ता अभी तक इस मामले में बचे हुए हैं। इसलिए इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
डॉक्टर गुप्ता को मामले में बचाने के हैं आरोप
शिकायतकर्ता शिल्पा वर्मा के पेश न होने के कारण आगे सरकी जांच
तीनों सिविल सर्जन पक्ष रखने के लिए पहुंचे
उधर, सिविल सर्जन डॉ. राजेश चौधरी ने कहा कि जांच प्रक्रिया के दौरान शिकायतकर्ता ही पेश नहीं हुई। शिकायतकर्ता की ओर से वकील अवश्य पेश हुआ और मामले की सुनवाई के लिए 19 अप्रैल की तारीख तय कराई। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता अपनी शिकायत को साबित करने के लिए जांच अधिकारी के सामने सबूत तो पेश करे। शिकायत का माकूल जवाब तथ्यों सहित दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जांच प्रक्रिया में अपना पक्ष रखने के लिए तीनों सिविल सर्जन गए थे लेकिन 19 अप्रैल को सुनवाई निर्धारित कर दी गई। वहीं उप सिविल सर्जन डॉ. विरेश भूषण तो इस मामले में पहले ही यह आरोप लगा चुके हैं कि सिरसा का एक डॉक्टर इस सारे मामले को तूल दे रहा है क्योंकि उसका अल्ट्रासाउंड सेंटर भी इसी तरह के मामले को लेकर लगभग दो बरसों से बंद है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है लेकिन वह किसी ने किसी के जरिए शिकायत करा कर अपना उल्लू सीधा करना चाह रहा है जो कभी हो नहीं सकता। एनजीओ की ओर से जो शिकायत दी गई है वह तथ्यहीन है और जांच में सफेद झूठ साबित होगी। उधर, गुप्ता अल्ट्रासाउंड सेंटर के संचालक डॉ. अशोक कुमार गुप्ता भी दावे से कहते हैं कि ‘मैं ऐसा काम तो मेरे बाप के लिए भी ना करूं। तमाम आरोप बेबुनियाद है। उनसे कोई भी पूछताछ कर सकता है। जब मैंने ऐसा कोई नाजायज कार्य किया ही नहीं तो मुझे डर कैसा।’