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टेंडर खोलने से पहले 10 बिड रद्द करने पर विपक्षी पार्षद भड़के

3 वर्ष पहले
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शहर के विभिन्न वार्डों में गलियों के निर्माण के लिए आमंत्रित टेंडर को ओपन करने की प्रक्रिया के विभिन्न तरह की अनियमितताएं बरते जाने को लेकर शुक्रवार को नगर परिषद कार्यालय में जमकर बवाल हुआ। टेंडर ओपन करने की प्रक्रिया को कंपलीट किए बगैर ही दस बिडों को रद्द करार देते हुए उन बिडों को संबंधित दो ठेकेदारों को वापस करना अन्य ठेकेदारों और विपक्षी पार्षदों को रास नहीं आया। उन्होंने नगर परिषद के ईओ विरेंद्र सहारण के कार्यालय के आगे नारेबाजी करते हुए रोष का इजहार किया। इसके साथ ही नप के ईओ और एमई ब्रांच पर घपला कर भ्रष्टाचार किए जाने का आरोप जड़ते हुए टेंडर रद्द कर मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग भी की।

हालांकि मामले को शांत करने के लिए नगर परिषद के ईओ विरेंद्र सहारण ने असंतुष्ट ठेकेदारों और पार्षदों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए उनको संतुष्ट करने का प्रयास भी किया। लेकिन वे ईओ के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए बल्कि और ज्यादा गुस्सा गए। गुस्साए ठेकेदारों ने ईओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जिला प्रशासन के अाला अफसरों से मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाए और ईओ को तबादला किया जाए।

प्रदर्शनकारियों में नगर परिषद के उपप्रधान रणधीर सिंह के अलावा पार्षद रोहतास वर्मा, पार्षद प्रतिनिधि दौलतराम सुखरालिया, राजेश शर्मा, गोपीराम सैनी, विक्की डाबर, हरीश मेहता, अमित सोनी, जश्न इंसां के अलावा ठेकेदार विजय झूंथरा, दिलीप गर्वा, दीपक कुमार, पवन कुमार, कैंडी जैन, अंशुल, नरेश सैनी व अन्य ठेकेदार भी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कार्यालय समय के बाद गुरुवार देर शाम तक टेंडर ओपन करने की प्रक्रिया को करने का काम किया गया ताकि इस प्रक्रिया के तहत की जाने वाली अनियमितताओं के बारे में किसी को पता न चल सके। लेकिन फिर भी अनियमितताएं उजागर हो ही गई। उन अनयिमतताओं को लेकर असंतुष्ट पार्षदों और ठेकेदारों ने एमई ब्रांच के लिपिक अशोक कुमार को भी खूब खरीखोटी सुनाई। उसकी टेबल पर पड़ी खोली गई बिडों की संख्या की भी गिनती कराई गई। उसमें भी अनियमितता पाई गई तो अशोक कुमार ने कहा कि बिडों को गिनने में गलती हो सकती है। लेकिन जब असंतुष्ट पार्षदों और पार्षद प्रतिनिधियों ने अशोक कुमार से यह पूछा कि जो 10 बिडें रद्द की गई हैं वे कहां हैं ? तो अशोक कुमार ने कहा कि इस बारे में ईओ या एमई से पूछो। उनकी मौजूदगी में ही 10 बिडों को टेंडर आईडी न होने पर रद्द की गई थीं। बाद में अशोक कुमार अपने रूम को ताला जड़ कर चले गए ताकि उससे और ज्यादा पूछताछ न की जा सके।

गलियों के निर्माण कार्य के टेंडर रद्द करने को लेकर रोष जताते उपप्रधान व पार्षद।

पिछले साल भी हो चुकी हैं अनियमितताएं
पार्षद प्रतिनिधि राजेश शर्मा के मुताबिक पिछले साल भी टेंडर आेपन प्रक्रिया के तहत इसी तरह की अनियमितता बरती गई थी जिसकी वजह से टेंडर को रद्द करना पड़ा था। इतना ही नहीं करीब तीन साल पहले शहर में गलियों के निर्माण को लेकर काफी बवाल हुआ था। उस दौरान नगर परिषद में कार्यरत रहे दो जेई को तो जेल की सलाखों के पीछे भी जाना पड़ गया था। ऐसी गली के नाम से पेमेंट किए जाने की स्वीकृति दे दी गई थी जिसका निर्माण भी नहीं किया गया था। मामले को लेकर एफआईआर भी दर्ज हुई और आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था। क्या इसी तरह की अनियमितताओं का खेल अब भी जारी रहेगा।

पार्षद और ठेकेदार बोले, अफसरों-ठेकेदारों में सांठगांठ
ठेकेदार नरेश सैनी, विजय झूंथरा, पवन गावड़िया, अजीत भादू व अंशुल कुमार ने कहा कि टेंडर ओपन किए बगैर रद्द की गई बिडें संबंधित ठेकेदार को वापस नहीं दे सकते। लेकिन नगर परिषद प्रशासन ने ऐसा गलत काम किया है। इससे संबंधित अधिकारियों और उन दो ठेकेदारों के बीच सांठगांठ हुई है जिनको रद्द बिडें वापस दी गई हैं ताकि वे आगामी 16 अप्रैल को आमंत्रित टेंडर में उन बिडों की रकम का इस्तेमाल कर सकें। इस सारी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का खेल खेला गया है और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। नगर परिषद उपप्रधान रणधीर सिंह और पार्षद प्रतिनिधियों दौलतराम सुखरालिया व राजेश शर्मा ने खुल्लमखुला आरोप लगाया कि इस टेंडर प्रक्रिया में रिश्वतखोरी किए जाने की आशंका है, इसलिए इस सारे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और टेंडर रद्द किया जाए।

कंडीशन पूरी नहीं थीं, इसलिए रद्द कीं बिड
शहर के विभिन्न वार्डों में गलियां निर्माण से संबंधित 60 कार्यों को कराने के लिए 2.80 करोड़ रुपये के दो टेंडर आमंत्रित किए हुए हैं। उनमें से 30 कार्यों का एक टेंडर के तहत आई बिडों को खोल कर उनको जांचने की प्रक्रिया गुरुवार शाम को शुरू की गई थी। कुल 52 बिडों में से 10 बिडें एेसी पाई गई जिनके साथ टेक्निकल आईडी नहीं थी। यानि वे बिडें टेंडर की कंडीशन पूरी नहीं कर रही थीं। इसलिए उनको ईओ, एमई राकेश पूनिया, श्रवण कुमार की मौजूदगी में रद्द कर दिया गया था। उस वक्त संबंधित ठेकेदार भी मौजूद थे। वे बिडें उनको वापस कर दीं।\\\'\\\' श्रवण कुमार, एमई, नगर परिषद, सिरसा

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