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परंपरागत खेती से बराबर होता था आढ़ती का हिसाब

3 वर्ष पहले
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गांव झोपड़ा में किसान अजय कुमार ने फूलों की खेती से ना केवल अपनी आमदन बढ़ा ली है, जबकि उसने अपनी विशेष पहचान भी कायम की है। उसके खेतों के फूलों से अब दिल्ली व पंजाब तक शादी समारोह के मंडप सजते हैं। वहीं परंपरागत खेती पर आधारित किसानों के लिए प्रेरणास्त्रोत भी यह किसान बना है। किसान अजय कुमार ने बताया कि उसके पास सिर्फ 6 एकड़ जमीन है। जिसमें पांच साल पहले वह परंपरागत खेती करता था। लेकिन उससे परिवार का गुजारा काफी मुश्किल था, क्योंकि खेती से सालाना होने वाली आमदन से आढ़ती का हिसाब ही बराबर हो पाता था। वर्ष 2013 में उसने कृषि वैज्ञानिकों से खेती की आमदन बढ़ाने का सुझाव लिया। जहां उसको परंपरागत खेती से हटकर फूलों की खेती करने की सलाह मिली थी।

दिल्ली- पंजाब तक फूलों का कारोबार

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लेकर किसान अजय कुमार पूसा अनुसंधान केंद्र दिल्ली से फूलों की वैरायटी लाया था। लेकिन अब उसके खेतों में लगने वाले फूलों का कारोबार दिल्ली व पंजाब तक फैला है। हालांकि पहले उसने 2 कनाल में गेंदा व मैगरेटा फूलों के पौधे उगाए। अच्छी आमदन होने लगी, तो अब वह तीन एकड़ में फूलों की खेती करता है। सालाना उसको प्रति एकड़ 3 लाख की आमदन होती है।

फूलों की खेती से भी किसान बढ़ा सकते हैं आमदन

डॉ. राहुल चौहान, एडीओ कृषि विभाग, सिरसा ने बताया कि फसल विविधीकरण एक एैसा जरिया है, जिससे किसान अपनी आय व भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ा सकता है। वहीं परंपरागत खेती से हटकर किसान फूलों की खेती से भी अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। गर्मी का मौसम गेंदा की खेती के लिए अनुकूल होता है। गांव झोंपड़ा के किसान अजय कुमार भी काफी सालों से फूलों की खेती कर खुशहाल बना है।

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