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10 बिड रद्द किए जाने से गलियों के निर्माण के टेंडर पर भी उठे सवाल, आज होगा फैसला

3 वर्ष पहले
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शहर के विभिन्न वार्डों में गलियों के निर्माण के लिए आमंत्रित टेंडर को ओपन करने की प्रक्रिया के दौरान विभिन्न तरह की अनियमितताएं बरते जाने को लेकर उपजे मामले से संबंधित टेंडर को रद्द किया जाए या नहीं, इस पर अभी तक नगर परिषद प्रशासन कोई निर्णय नहीं ले सका है।

इस मामले को नगर परिषद के ईओ विरेंद्र सिंह सहारण ने लंबित रखते हुए मंगलवार को निर्णय लेने की बात एमई से कही। नगर परिषद के एमई राकेश पूनिया ने सोमवार को उक्त मसले को लेकर करीब तीन घंटों तक खूब माथापच्ची की। बाद में फाइल नोटिंग तैयार की और टेंडर को रद्द करने की अनुशंसा भी की। फाइल को ईओ विरेंद्र सिंह सहारण के समक्ष पुटअप किया। लेकिन उस वक्त ईओ किसी अन्य मामले में व्यस्त थे। बाद में ईओ लंच करने चले गए। लंच करने के बाद आए तो उन्होंने एमई राकेश पूनिया को बताया कि वे टेंडर के मामले में मंगलवार को विचार विमर्श करने के बाद निर्णय लेंगे कि टेंडर रद्द करना है या नहीं।

बता दें, इस मामले को लेकर कुछ असंतुष्ट ठेकेदारों और विपक्षी पार्षदों ने नगर परिषद के ईओ के ऑफिस के आगे बीते शुक्रवार को नारेबाजी करते हुए रोष का इजहार भी किया था। हालांकि ईओ ने प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए अपना पक्ष भी रखा। लेकिन वे ईओ के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए बल्कि और ज्यादा गुस्सा गए।

गुस्साए ठेकेदारों ने ईओ के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जिला प्रशासन के अाला अफसरों से मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाए और ईओ को तबादला किया जाए। प्रदर्शनकारियों में नगर परिषद के उपप्रधान रणधीर सिंह के अलावा पार्षद रोहतास वर्मा, पार्षद प्रतिनिधि दौलतराम सुखरालिया, राजेश शर्मा, गोपीराम सैनी, विक्की डाबर, हरीश मेहता, अमित सोनी, जश्न इंसां के अलावा ठेकेदार विजय झूंथरा, दीपक कुमार, पवन कुमार, कैंडी जैन, अंशुल, नरेश सैनी व अन्य ठेकेदार भी शामिल थे।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि कार्यालय समय के बाद बीते गुरुवार देर शाम तक टेंडर ओपन करने की प्रक्रिया को करने का काम किया गया ताकि इस प्रक्रिया के तहत की जाने वाली अनियमितताओं के बारे में किसी को पता न चल सके। लेकिन फिर भी अनियमितताएं उजागर हो ही गई।

टेंडर ओपन किए बगैर रद्द की गई बिड नहीं दे सकते वापस

ठेकेदार नरेश सैनी, विजय झूंथरा, पवन गावड़िया, अजीत भादू व अंशुल कुमार ने कहा कि टेंडर ओपन किए बगैर रद्द की गई बिडें संबंधित ठेकेदार को वापस नहीं दे सकते। लेकिन नगर परिषद प्रशासन ने ऐसा गलत काम किया है। इससे संबंधित अधिकारियों और उन दो ठेकेदारों के बीच सांठगांठ हुई है जिनको रद्द बिडें वापस दी गई हैं ताकि वे आगामी आमंत्रित टेंडर में उन बिडों की रकम का इस्तेमाल कर सकें। इस सारी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का खेल खेला गया है और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है। नगर परिषद उपप्रधान रणधीर सिंह और पार्षद प्रतिनिधियों दौलतराम सुखरालिया व राजेश शर्मा ने खुल्लमखुला आरोप लगाया कि इस टेंडर प्रक्रिया में रिश्वतखोरी किए जाने की आशंका है, इसलिए इस सारे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और टेंडर रद्द किया जाए। उधर, एमई श्रवण कुमार का कहना है कि कंडीशन पूरी न करने वाली 10 बिडों को रद्द किया गया था। शहर के विभिन्न वार्डों में गलियां निर्माण से संबंधित 60 कार्यों को कराने के लिए 2.80 करोड़ रुपये के दो टेंडर आमंत्रित किए हुए हैं। उनमें से 30 कार्यों का एक टेंडर के तहत आई बिडों को खोल कर उनको जांचने की प्रक्रिया गुरुवार शाम को शुरू की गई थी। कुल 52 बिडों में से 10 बिडें एेसी पाई गई जिनके साथ टेक्नीकल आईडी नहीं थी। यानि वे बिडें टेंडर की कंडीशन पूरी नहीं कर रही थीं।

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