श्री सालासर धाम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वामन अवतार की कथा का वर्णन सुनाते हुए साध्वी सरोजबाला ने कहा कि दंभ और अहंकार से जीवन में कुछ हासिल नहीं होता और यह भी कि धन संपदा क्षणभंगुर होती है।
उन्होंने कहा कि श्रीहरि जिस पर कृपा करें, वही सबल है। उन्हीं की कृपा से देवताओं ने अमृतपान किया। उन्ही की कृपा से असुरों पर युद्घ में वह विजयी हुए। इसके बाद असुरों में राजा बलि हुए, जिन्होंने अश्वमेघ यज्ञ किया। इसमें भगवान विष्णु के पांचवें अवतार वामन अवतार ने ब्राह्मण रूप में पहुंचकर तीन पग भूमि दान में मांगी तो राजा बलि ने देना स्वीकार किया। राजा बलि जान चुके थे कि भगवान द्वार पर है, किंतु द्वार पर आए किसी भी ब्राह्मण को खाली नहीं जाने दे सकते। इस प्रकार कथा के माध्यम से साध्वी सरोजबाला ने वामन अवतार कथा व उसके महत्व पर प्रकाश डाला। इसी के साथ उन्होंने श्री राम जन्म व कृष्ण जन्म का भी प्रसंग सुनाया। भगवान के जन्म की लीलाओं का वर्णन किया गया और कृष्ण जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया गया। श्रीकृष्ण का जन्म होते भक्तगण बधाई गाने लगे और झूमने लगे। साध्वी सरोजबाला कहा कि जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो अपने आप जेल के ताले खुल गए थे।
कथा सुनातीं साध्वी सरोजबाला।