हरियाणा लैब टैक्नीशियन एसोसिएशन की प्रदेशस्तरीय रविवार को बरनाला रोड स्थित वैलकम पैलेस में हुई। जिलाध्यक्ष देवेंद्र गौड़ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्रदेशभर से लैब संचालक पहुंचे और हरियाणा सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया।
प्रदेशाध्यक्ष रमेश अहलावत ने लैब संचालकों को संबोधित करते हुए कहा कि एमबीबीएस डॉक्टर या एमडी पैथोलॉजिस्ट अनिवार्य करने संबंधी हरियाणा सरकार के आदेशों के खिलाफ लैब संचालकों में रोष है। नए आदेशों के तहत अब लैब टैक्नीशियन को रिपोर्ट के नीचे हस्ताक्षर करने की इजाजत नहीं है। अब सरकार ने नए आदेश जारी कर लैबों में एमबीबीएस डॉक्टर अथवा एमडी पैथोलॉजिस्ट अनिवार्य कर दिया है, जो कि संभव ही नहीं है। जितनी संख्या में प्रदेश में लैब हैं उतनी संख्या में तो डॉक्टर ही नहीं है। उन्होंने कहा कि हर लैब पर डॉक्टर रखा जाना संभव नहीं हो सकता, अगर रखा जाएगा तो लैब की रिपोर्ट बहुत महंगे हो जाएंगे, इसका भार आम लोगों पर ही पड़ेगा। बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए रमेश अहलावत ने कहा कि हरियाणा सरकार लैब संचालकों के हितों पर कुठाराघात कर रही है। कोई भी सरकार आमजन से ही होती है, मगर वर्तमान भाजपा सरकार लैब संचालकों का शोषण कर रही है। वर्तमान में जो आदेश हरियाणा सरकार की ओर से लैब संचालकों को दिए गए है, इसके बाद लैब संचालक बर्बादी की कगार पर आ गया है। सरकार को चाहिए था कि वह माननीय अदालत में लैब संचालकों की पैरवी करती, मगर सरकार ने ऐसा नहीं किया। इससे स्पष्ट होता है कि हरियाणा सरकार लैब संचालकों की हितैषी नहीं हो सकती। इसी के विरोध स्वरूप इस बैठक का आयोजन किया गया है, जिसमें यह निर्णय लिया गया है कि अगर हरियाणा सरकार ने लैब संचालकों की पैरवी नहीं की, तो संचालकों को मजबूरन संघर्ष की राह चुननी होगी, जिसकी जिम्मेदारी हरियाणा सरकार की होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले 5 सालों में लैब टैक्निशियन की नियमित भर्ती नहीं की। सरकार को चाहिए कि रोजगार छीनने से पूर्व रोजगार का बंदोबस्त करें। उन्होंने कहा कि लैब संचालक शीघ्र ही हड़ताल करने पर मजबूर है। अगर यह हड़ताल हुई, तो इसका सीधा प्रभाव आमजन पर होगा। लैब पर सस्ती दरों में होने वाले टैस्ट आमजन को महंगे पड़ेंगे।
मांगों को लेकर आंदोलन की जानकारी देते प्रदेशाध्यक्ष रमेश अहलावत।