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होटल व ढाबों पर दो बाल श्रमिक पकड़े

3 वर्ष पहले
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जिला बाल संरक्षण यूनिट ने बाल मजदूरी पर अंकुश लगाने के प्रयासों में मंगलवार को शहर के नोहरिया बाजार, भादरा बाजार व सरकूलर रोड पर स्थित विभिन्न ढाबों, होटलों व मिठाई की दुकानों में छापेमारी की। इस दौरान ढाबा संचालकों व संस्थान मालिकों को बाल श्रम नहीं करवाए जाने की हिदायत दी और उनको कानूनी जानकारी भी दी। उन्हें बताया कि बाल श्रम करवाना गैर कानूनी है। वहीं छापेमारी के दौरान दो बाल श्रमिकों को विभिन्न संस्थानों में बाल मजदूरी करते हुए पकड़ा। बाल श्रमिकों ने खुद को यूपी के निवासी बताया है। दोनों बाल श्रमिकों को उसके परिजनों के हवाले यह चेतावनी देते हुए किया है कि वह भविष्य में बाल श्रम नहीं करवाएंगे। इसके साथ ही संबंधित संस्थान मालिक से भी बाल श्रम न कराने बारे हल्फिया बयान संबंधित टीम ने लिए हैं।

डीसी प्रभजोत सिंह के निर्देशानुसार जिला बाल सरंक्षण अधिकारी डॉ. गुरप्रीत सिंह गिल, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दर्शना सिंह, स्वास्थ्य विभाग से हरबंस काउंसल व जगदीश कुमार, लीगल कम प्रोवेशन ऑफिसर मोनिका चौधरी, बाल कल्याण समिति से गीता कथूरिया, शिक्षा विभाग से जयसिंह, कॉर्डिनेटर चाइल्ड लाइन से जसप्रीत सिंह, लेबर इंस्पेक्टर सत्यवान और एएसआई राजेंद्र कुमार की टीम ने बाल मजदूरी को रोकने के लिए शहर में अभियान चलाया। जिसके तहत टीम ने सबसे पहले सरकूलर रोड पर स्थिति मिष्ठान भंडार पर छापेमारी की। उसके बाद विभिन्न बाजारों में ढाबों, होटलों और करियाणा की दुकानों में चेकिंग की। इस दौरान टीम ने एक ढाबे की रसोई में दस्तक दी, तो वहां एक बाल श्रमिक काम करता मिला, जिसने बताया कि वह मूल रूप से यूपी का रहने वाला है। लेकिन उसका परिवार सिरसा में रहता है।

सिरसा। जिला बाल संरक्षण यूनिट की टीम होटलों व ढाबा संचालकों को बाल श्रम नहीं करवाने की हिदायत देते हुए।

गैरकानूनी है बाल श्रम कराना : डॉ. गुरप्रीत कौर

जिला बाल संरक्षण अधिकारी डॉ. गुरप्रीत कौर गिल ने कहा कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे से बाल श्रम कराना गैरकानूनी है। बाल श्रम कराने की सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण यूनिट हरकत में आती है और मौके पर पहुंच कर कार्रवाई भी की जाती है। नियमों के मुताबिक 14 साल से कम आयु के बच्चों से मजदूरी या अन्य कोई काम कराते पकड़ा जाता है, तो तीन साल की सजा और 10 से 20 हजार रुपये तक जुर्माना भी किया जा सकता है। इतना ही नहीं उस बच्चे के पुनर्वास के लिए 10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी हो सकता है।

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