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भगवत भजन-कीर्तन का जीवन में बहुत महत्व

3 वर्ष पहले
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सिसई प्रखंड के कुदरा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीश्री 1008 वैदिक हनुमंत महायज्ञ सह हनुमंत प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। जगतगुरु वनांचल पीठाधीश्वर स्वामी दीनदयाल ने प्रवचन में कहा कि भगवत भजन-कीर्तन का जीवन में बहुत महत्व है।

भगवत नाम कर्म रूपी बीज को जागृत करता है। हम अपने दु:खों को भगवान के चरणों में रखें। अपने गुरु के सामने प्रकट करें। धर्म के प्रति जागरूक रहना होगा। जीव को जन्म लेते समय एक हजार बिच्छु के डंक मारने के समान दर्द होता है। उन्होंने कहा कि भवसागर को पार करने का उपाय केवल हनुमान जी के पास है। भगवान को प्रसन्न करना है तो हनुमान जी को प्रसन्न करना पड़ता है। हनुमान जी केवल भगवान का भजन-कीर्तन सुनते हैं। हनुमान चालीसा सभी रोगों का निदान है। वहीं वृंदावन से आए कलाकारों ने शिव पार्वती व नंदी की आकर्षक झांकी निकाली, जो भक्तों को मोह लिया। इसके बाद शिव पार्वती का तांडव नृत्य माहौल को भक्तिमय बना दिया। महाराज जी का प्रवचन सुनने के लिए कुदरा, भदौली, लकेया, सिसई, बरगांव, रेडवा, सकरौली, लरंगो, पुसे, छरदा, भुरसो व मुरगू समेत प्रखंड के विभिन्न गांव से हजारों की संख्या में भक्त उपस्थित थे।

कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रधानाचार्य काशीनाथ तिवारी, अरुण सिंह, बद्रीनारायण सिंह, नागेंद्र जायसवाल, घनश्याम आर्य, सुखन लोहरा, संदीप भगत, राजकुमार पौराणिक, विक्रम बड़ाईक, ओज जायसवाल, शंभुनाथ चौहान, अजय भगत, प्रकाश उरांव, जयराम उरांव, राजकिशोर सोनी, बैजनाथ जायसवाल, आचार्य बिक्रम गुप्ता, गजराज महतो, विष्णु लोहरा, फुलेश्वर महतो, दीपक सिंह व सुरेश सिंह समेत समाजसेवी शामिल थे।

श्रीश्री 1008 वैदिक हनुमंत महायज्ञ में उमड़े भक्त, वृंदावन के कलाकारों ने निकाली शिव पार्वती व नंदी की आकर्षक

कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु।

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