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राजस्व खातों में उपनाम सुधार की कवायद शुरू नहीं

3 वर्ष पहले
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दिलीपसिंह राजपुरोहित | मोकलसर

भारतीय संविधान ने भले ही प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार दिया है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते सिवाना उपखंड क्षेत्र के कई राजस्व खाता धारकों को आजादी के सालों बाद भी सम्मानजनक नाम नहीं मिल पाया है। राजस्व खातों के नाम सुधार की कवायद अभी सिरे नहीं चढ़ पाईं। दरअसल ग्रामीण क्षेत्र में राजस्व रिकॉर्ड में वर्षों पहले कई व्यक्तियों के नाम रामुडा, प्रेमला, भलिया, छतरियां, आसिया, समुड़ी, धनिया, बलिया जैसे उपनाम दर्ज हो गए, जबकि इनका वास्तविक नाम कुछ ओर है। ऐसे में नाम को सम्मानजनक बनाने के लिए सरकार ने राजस्व रिकॉर्ड में सुधार की कवायद शुरू तो की लेकिन प्रसार के अभाव के साथ लोग निरक्षर होने से नाम सुधार के आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। सिवाना व समदड़ी तहसीलों के सैकड़ों राजस्व खातेदारों के नाम आधे अधूरे है। जबकि महज कुछ पढ़े लिखे खातेदारों ने प्रशासन गांवों के संघ अभियान के दौरान और तहसील कार्यालय पहुंच कर नाम शुद्धिकरण करवाए।

निरक्षरता बनी बाधक

सम्मान सूचक नाम नहीं होने की दशा में सरकार की ओर से दुरुस्ती करण के प्रयास किये जा रहे हैं, लेकिन निरक्षरों के लिए सरकारी कायदे बाधक बन रह गए हैं। सरकार की ओर से ऐसे नामों के शुद्धिकरण से पूर्व खातेदारों से आवेदन लेने के आदेश है, मगर कई लोग अनपढ़ होने से नाम शुद्धिकरण के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।

बेवा शब्द का इस्तेमाल

सरकार ने 1995 में निर्देश जारी कर बेवा शब्द हटा दिया था, इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में आज भी बेवा शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। भूमि संबंधित दस्तावेज़ में राजस्व अधिकारी व कार्मिक विधवा महिलाओं के लिए बेवा शब्द दर्ज कर रहे हैं।

यह आ रही परेशानी

राजस्व विभाग के उपशासन सचिव ने 30 अप्रेल2003 एवं 18 जून 2007 को परिपत्र जारी कर बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में पाबुडा वल्द रामुड़ा, कमिया जैसे नाम सम्मान सूचक नहीं है। ऐसे गलत नाम की दशा में उपखंड अधिकारी नियमानुसार कार्यवाही करते हुए राजस्थान भू राजस्व अधिनियम की धारा 1956 की धारा 136 के तहत त्रुटियां का दुरस्तीकरण करें, लेकिन आवेदन प्रक्रिया व निरक्षरता से नाम शुद्धिकरण में बाधक बन रही है।

सुधार करवाएंगे

राजस्व खातों में नाम शुद्धिकरण के लिए हमने प्रशासन गांवों के संघ अभियान 2016 एवं 17 में 5000 से ज्यादा नामो में सुधार कर लिए हैं। अब कोई भी खाताधारक अपना आधार कार्ड जमा करवा कर राजस्व रिकॉर्ड में अपना नाम सही करवा सकता है। लोगों को प्रेरित कर इस वर्ष के अंत तक सभी गलत नाम सही कर देंगे। वैसे लोगों में निरक्षरता के वजह से परेशानी हो रही है। विधवा के लिए उपयुक्त बेवा शब्द को भी राजस्व रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा। कालूराम कुम्हार, तहसीलदार, सिवाना

निरक्षरता के कारण अधिकतर लोग नहीं कर पाते आवेदन, अभी भी कई समाज में पुराने असम्मानजनक उपनाम

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