कोर्ट में हुई फायरिंग में मारे गए पुलिस कर्मी को शहीद का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर धरना
कोर्ट परिसर में 7 मई को हुई गोलीबारी में मारे गए पुलिसकर्मी भागीरथ को शहीद का दर्जा, एक करोड़ की राशि और योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी व थाना परिसर में प्रतिमा स्थापित करने की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों ने तहसील परिसर में परिजनों के साथ धरना दिया।
लोहारू से इनेलो के विधायक ओमप्रकाश बड़वा के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम से तहसीलदार को ज्ञापन सौंपाकर सरकार को 10 दिनों का अल्टीमेटम दिया। मांग पूरी न होने पर मृतक हवलदार के पूरे परिवार सहित अनिश्चितकालीन धरना देने की चेतावनी दी।
हलका लोहारू से इनेलो विधायक ओमप्रकाश बड़वा के नेतृत्व में दिए गए इस धरने में किसान सभा, जनजागृति मंच, बार एसोसिएशन के अलावा नंबरदार एसोसिएशन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने भाग लिया। सूचना मिलने के बाद तहसीलदार रतन सिंह धरनास्थल पर पहुंचे और ज्ञापन लिया। इस दौरान हलका विधायक ने चेतावनी दी कि वे इस मामले को लेकर विधानसभा सत्र में भी उठाएंगे और 10 दिनों के अंदर अगर सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया तो तहसील परिसर में परिवार सहित अनिश्चितकालीन समय के लिए धरना शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान दिवंगत हवलदार भागीरथ का पुत्र ललित, बार सचिव राजीव श्योराण, सुनील परिहार, सुनील कौशिक, सुकर्म आदि मौजूद रहे।
7 मई को सिवानी में हुई फायरिंग में हुई थी मौत
7 मई को भिवानी से कैदियों को सिवानी अदालत में पेशी पर लाया गया था। कैदियों को मारने के इरादे से आए बदमाशों ने फायरिंग की। जिससे हवलदार भागीरथ बदमाशों की गोलियां का शिकार हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। सरकार ने हालांकि उनकी मौत के बाद परिवार को 30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर दी थी लेकिन परिजनों से लेकर शहर के लोग सरकार की इस घोषणा से संतुष्ट नहीं है। इसे लेकर हलका विधायक ओमप्रकाश बड़वा के नेतृत्व में विभिन्न संगठनों ने दिवंगत हवलदार भागीरथ के परिजनों के संग तहसील परिसर में धरना देकर रोष का जताया।
उधर, टोकन देकर सरसों न खरीदने का आरोप लगा किसानों ने दिया धरना
तहसीलदार को ज्ञापन सौंपते हुए किसान।
सिवानी मंडी | अखिल भारतीय किसान सभा ने किसानों की सरसों खरीद न होने पर तहसील परिसर में धरना दिया, जिसकी अध्यक्षता जिला पार्षद एवं किसान नेता बलवान बागड़ी ने की। उन्होंने कहा कि जिन किसानों को हैफेड ने टोकन जारी किया हुआ है उनकी सरसों खरीद की जानी चाहिए, क्योंकि 1 से 10 मई तक का शेड्यूल हैफेड ने जारी किया था उन तारीखों में उन किसानों की सरसों खरीदने की बजाय उनकी फर्द पर यह कर नंबर लगा दिया कि आपको बाद में बुलाएंगे, परन्तु अब हैफेड के अधिकारी सरसों को तोलने से मना कर रहे हैं। बागड़ी ने कहा कि सरसों तुलाई के अंदर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है इसकी उच्च स्तरीय जांच करवाई जानी चाहिए। दस मई को सरकार ने सरसों खरीद कार्य बंद कर दिया परन्तु सिवानी में हैफेड के अधिकारी अभी तक सरसों की तुलाई कर रहे है, तोली गई सरसों की लिस्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए उसका भुगतान तुरंत किया जाए। किसानों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस मौके पर दयानंद पूनिया, सुकर्म सिंह, राम कुमार श्योराण सहित अनेक किसान नेता मौजूद थे।