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जिले की 321 में से 197 पंचायतों में एक भी ग्रामीण को रोजगार नहीं, 124 में सिर्फ 16 हजार को ही मिला

3 वर्ष पहले
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उदयवीरसिंह राजपुरोहित | पाली

ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत ग्रामीणों को रोजगार देने का दावा करने वाली सरकार अपनी इस योजना में ही पिछड़ रही है। स्थिति इतनी खराब है कि जिले की सिर्फ 124 ग्राम पंचायतों में ही मनरेगा के तहत श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें भी रोजगार प्राप्त करने वालो की संख्या काफी कम है। बीते कुछ दिनों से मनरेगा के तहत संविदा पर लगे कार्मिकों के हड़ताल पर चले जाने से प्रदेश में मनरेगा की स्थिति खराब हो गई है। हर दिन लगातार कार्य बंद हो रहे हैं। कार्मिकों के काम के बहिष्कार व हड़ताल पर होने के कारण श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। जिले में भी मनरेगा के कार्य ठप होने की कगार पर है। इधर, पंचायतीराज विभाग द्वारा 2013 में कनिष्ठ लिपिक के 19 हजार 515 पदों व एसएसआर के 4 हजार 915 विभिन्न पदों के लिए भर्ती निकाली गई। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बोनस विवाद का निर्णय 29 नंवबर 2016 को सरकार व संविदा कार्मिकोंं के पक्ष में आ चुका है।

पिछले साल मई में 1 लाख 3 हजार श्रमिकों को मिला था रोजगार, करवाये थे 3 हजार से ज्यादा कार्य

भास्कर खास

2017-18 :

पिछले साल मई में 1 लाख 3 हजार 554 श्रमिकों को मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया गया था। इसमें 3 हजार 219 कार्यों पूरे करवाए गए थे।

2018-19 :

इस साल मई में सिर्फ 16 हजार श्रमिकों को ही मनरेगा के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही सिर्फ 367 कार्य ही कराएं जा रहे हैं।

जिले में वर्तमान मनरेगा की स्थिति

कुल पंचायतें - 321

काम सुचारु पंचायतें - 124

कार्यरत श्रमिक - 16 हजार 397

कुल कार्य - 367

प्रदेश में वर्तमान में मनरेगा की स्थिति

कुल पंचायतें : 9894

काम सुचारू पंचायतें : 4451

कार्यरत श्रमिक : 833103

कुल कार्य : 45284

इन पंचायत समितियों में तो हालात इतने खराब

रायपुर की 35 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 42 को रोजगार

जिले में 321 ग्राम पंचायतों में से शुक्रवार तक केवल 124 ग्राम पंचायतों में ही कार्य सुचारू था

इन 124 ग्राम पंचायतों में विभिन्न प्रकार के 367 कार्य संचालित हो रहे हैं। जहां पर 16 हजार 367 श्रमिकों को रोजगार मिला हुआ है। इस प्रकार की गर्मी के सीजन में हर वर्ष पाली जिले में 1 लाख 35 हजार तक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन इस वर्ष एमआईएस, कंप्यूटर ऑपरेटर, रोजगार सहायक समेत संविदाकर्मियों के हड़ताल पर चले जाने के कारण मनरेगा का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित हो रहा है। इधर, मनरेगा कार्मिकों के काम के बहिष्कार के बाद अब पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारियों ने भी इसका समर्थन कर दिया है।

यह मांगें व संगठन समर्थन में

पंचायत राज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारी संघ ब्लॉक ने मनरेगा संविदा कर्मिकों के आंदोलन का समर्थन कर दिया है। इसको लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। मनोज कुमार ने बताया कि कैडर रिव्यू कर कैडर स्ट्रेंथ बढाने, कनिष्ठ लिपिक भर्ती 2013 में शेष रहे पदों पर पुन भर्ती करने, गृ़ह जिले में स्थानांतरण के नियम बनाने, अनुकंपा नियुक्ति में लगे कनिष्ठ लिपिकों को टंकण परीक्षा से राहत देने की मांग की। इस दौरान हनुवंत जैन, ललित शर्मा, हाजी मोहम्मद, धन श्याम शर्मा, गुणबाला, योगिता जोशी, सपना चौहान, प्रियंका, नरेश सीरवी, हनवंतसिंह, शेरसिंह, जितेंद्र, बाबूदास, विक्रमसिंह, श्रवण, पदमसिंह, रुप सिंह, दिलीप मेवाड़ा सहित कई कार्मिक मौजूद थे।

देसूरी की 24 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 104 को रोजगार

पाली की 23 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 384 को रोजगार

सोजत की 38 ग्राम पंचायतों में सिर्फ 449 को ही रोजगार

163.83 लाख रुपए का बजट भी अटका

मनरेगाकर्मियों के काम के बहिष्कार व हड़ताल पर चले जाने के कारण जिले में करीब 163.83 लाख का भुगतान बकाया पड़ा है। इसमें श्रमिकों की 153.03 लाख रुपए की राशि, निर्माण सामग्री व मेट का 7.82 लाख का भुगतान भी अटक चुका है। जिले में पूरी तरह से मनरेगा काम ठप हो गए है। ग्रामीण रोजगार के लिए भटक रहे हैं।

इधर, संविदा कार्मिक के लिए रखा दो मिनट का मौन

मनरेगा के कार्यरत संविदा कार्मिक ओमप्रकाश भील को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राहुल गहलोत, मदनलाल मीणा, अमित त्रिवेदी, मो. आसिफ, मनीष राजपुरोहित, उम्मेदसिंह, अयूब खान, सआदत अली, हरीश अवस्थी, सरोज सहित कई मनरेगा कार्मिक मौजूद थे।

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