पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने पत्र व्यवहार कर कंप्यूटर आपरेटरों को हटाने का आदेश जारी कर दिया था। जिसका प्रदेश स्तर पर विरोध हो गया। सरकार ने फैसला वापस ले लिया। अब इन कंप्यूटर आपरेटरों को अलग तरीके से हटाने की साजिश रची जा रही है। इसके तहत कंप्यूटर आपरेटरों को सोमवार (21 मई) टाइपिंग स्पीड और अन्य आवश्यक बिंदुओं का टेस्ट देने का निर्देश दिया गया था। सोमवार सुबह को लघु सचिवालय परिसर में आपरेटरों ने इसका विरोध कर दिया। आपरेटर टेस्ट नहीं देने के लिए अड़ गए। आपरेटरों ने कहा कि उनकी नियुक्ति टेस्ट के बाद की गई थी। हर साल टेस्ट का क्या औचित्य बनता है। सरकार और प्रशासन अगर उन्हें अगर हटाना चाहता है तो हटा दे, लेकिन वह टेस्ट नहीं देंगे। तहसीलदार को ज्ञापन सौंप, सभी हड़ताल पर चले गए। जिले के ई-दिशा केंद्र, तहसीलाें और विभिन्न विभागों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को एक पखवाड़े पहले बताया गया कि 21 मई को उनका टेस्ट होगा। तभी से ऑपरेटरों के बीच आपस में विचार-विमर्श चल रहा था। सोमवार को आखिरकार सभी ने एकमत से निर्णय लिया कि कोई भी टैस्ट नहीं देगा।
जिले भर में 107 आपरेटर : जिले के विभिन्न विभागों में 107 कंप्यूटर आपरेटर कार्यरत हैं। इसमें गोहाना, गन्नौर, खरखौदा सहित राई उप तहसील भी शामिल है। जबकि प्रदेश स्तर पर इनकी काफी संख्या है। कंप्यूटर आपरेटरों ने कहा कि चार-चार साल वह विभागों में दिए हैं। बड़ी संख्या में आपरेटरों से कार्य अधिकारी मनमर्जी से लेते हैं। ऐसी जगहों पर काम पर लगाया गया है, जहां पर स्पीड का कोई मतलब नहीं है। ऐसे में सभी का फिर से स्पीड का टैस्ट अनैतिक है। जो किसी सूरत कोई नहीं देगा।
पहले भी होता है टैस्ट: मामले में जब एसडीएम प्रशांत पंवार से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि इसमें नया कुछ नहीं है, पहले भी टैस्ट हुआ है। जब उनसे कहा गया कि अगर पहले कई बार टैस्ट हो चुका है तो अब टैस्ट की क्या अनिवार्यता है। अगर ऐसा है तो सभी दोबारा मूल्यांकन होना चाहिए। अगर हटाना ही है तो सीधे तरीके से क्यों नहीं हटाया जाता है।
सोनीपत . कंप्यूटर ऑपरेटरों के हड़ताल पर जाने से काम के लिए खड़े लोग।
खिड़कियों पर लोग करते रहे आपरेटरों का इंतजार
लघु सचिवालय में तहसील कार्यालय, ई दिशा केंद्र सहित उन सभी स्थानों पर कुर्सियां खाली रही जहां पर कंप्यूटर आपरेटर कार्यरत थे। आपरेटरों ने 11 बजे ही अपनी कुर्सी छोड़ दी। वह पहले तो एसडीएम से मिलने पहुंचे, लेकिन एसडीएम ने कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया। इसके बाद इन लोगों ने मीटिंग कर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और वापस अपने-अपने घर चले गए। इससे विभिन्न कार्यों के लिए दूर दराज से आए लोग खिड़कियों पर दिनभर इंतजार कर निराश लौट गए।