इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इंसान नहीं कर सकता है। बशर्ते जो चाहत है उसके लिए तन मन और धन से कठिन परिश्रम करने की आवश्यकता है। इस समूचे संसार में कर्म ही प्रधान है। कर्म से ऊंचाई मिलती है। स्कूल में अध्यापक के आसपास रहने वाले विद्यार्थी होमवर्क से तो बच सकते हैं। अध्यापक की डांट से बच सकते हैं, लेकिन जीवन में कैरियर उसी बच्चे का अच्छा होगा जो अध्यापक द्वारा प्रदान की गई शिक्षा का सही से अनुसरण करेगा। वह बच्चा जीवन में कभी फेल नहीं होगा।
रेलवे रोड स्थित निरंकारी भवन के साप्ताहिक सत्संग में संत विद्या सागर बाटला ने कहा कि गुरु की नजदीकी से कोई विशेष फायदा नहीं होता। गुरु व गुरु परिवार की इधर उधर की बातों मे न पड़ कर उनकी शिक्षाओं पर ध्यान देना आवश्यक है। प्रभु न्याय कारी होता है, गुरु क्षमाशील होता है। हमें गुरु के सामने समर्पित होना है। अपने व्यक्तिगत जीवन की एक घटना बताते हूए उन्होंने कहा कि गुरु के आगे अपनी चतुराई छोड़ कर व समर्पित हो कर ही स्वयं को बख्शवाया जा सकता है। सद्गुरु माताजी का उद्धरण देते हुए कहा कि हम बाबाजी के 36 वर्ष का जिक्र करते हैं, लेकिन हम उनकी सिर्फ 36 शिक्षाओं को ही जीवन मे ढाल लें तो जीवन एक सुंदर रूप ले सकता है। प्रभु पर हमारा अटूट विश्वास बना रहे। जो भी होता है ठीक होता है, फिर भी मन क्यों उदास होता है। सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सत्संग के बाद प्रसाद का वितरण किया गया।