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प्रभु श्रीराम ने सदैव सम्मान के साथ जीवन यापन करने की प्रेरणा दी : श्रवणानंद

3 वर्ष पहले
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श्री सनातन धर्म सभा दुर्गा मन्दिर मोहल्ला कलां में चल रहा सात दिवसीय श्रीराम कथा का शुक्रवार को कथा, हवन और भंडारे के बाद समापन हो गया। स्वामी श्रवणानंद महाराज सरस्वती की छत्र छाया में धार्मिक उत्सव मनाया गया। मंगला चारण के श्लोकों से शुक्रवार को शुभारंभ किया। इसके बाद सुंदर भजनों की अमृत वर्षा की।

श्रवणानन्द सरस्वती ने श्री राम कथा मंदाकिनी में श्रोताओं को भाव-विभोर किया। उन्होंने कहा कि जिसने प्रेम को जाना हो उसे पदार्थ नहीं रोक सकते, श्री राम जी की वन गमन यात्रा में अयोध्या के बहुत सारे निवासी भी साथ गए थे, जो राम के साथ प्रथम पड़ाव तमसा नदी के किनारे किया। महाराज ने कथा में कहा कि लक्ष्मण जी का जागरण का प्रारंभ यही से शुरू होता है। रात में ही सीता राम लक्ष्मण सुमंत के साथ रथ में बैठे श्री राम ने सुमंत जी से कहा, हे तात रथ को इस तरह चलाओ रथ के पहिये के निशान पृथ्वी पर न पड़ें। सुमंत जी ने ऐसी दिव्यता दिखाई। प्रात: काल श्री राम सीता सहित श्रृंगवेटपुर नामक छोटे से गांव से जो कि गंगा के समीप पहुंच गए। उन्होंने मित्र धर्म, भाई धर्म, पति धर्म, धर्म प|ी, धर्म सेवक, धर्म व श्री लक्ष्मण जी ज्ञान व गंगा पार करना आदि प्रसंग विस्तार से सुनाए। मौके पर मुख्य यजमान ब्रह्म देवी एवं मूलराज शर्मा, प्रैस प्रवक्ता श्रवण खट्टर, मानसी एवं धीरज, बलदेव राज अाहुजा आदि मौजूद रहे।

श्रवणानंद जी

सोनीपत . दुर्गा मन्दिर मोहल्ला कलां में भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु।

प्रभु की शरण में जाने से होते हैं निर्भय
सोनीपत | आर्य समाज माडल टाउन में हो रहे वार्षिक उत्सव के पांचवे दिन मनुष्य के कर्म पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता नरेन्द्र मैत्रेय ने कहा कि परमात्मा ने हमारे कर्म फल व्यवस्था के अनुसार विभिन्न योनियों से सर्वश्रेष्ठ मनुष्य तन प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि भौतिक चीजें सभी यहीं रह जाती है, लेकिन मनुष्य के कर्म कभी उसका साथ नहीं छोड़ते। प्रभु की शरण में जाने से ही हम निर्भय होते हैं और आनंद मिलता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता अर्जुन देव ने की। इस मौके पर राजेंद्र बत्रा, विनोद सहगल, महात्मा वेद मुनि, सुरेन्द्र खुराना, हरिचंद स्नेही, हरबंसलाल अरोड़ा, महेश जुनेजा, सरला ठक्कर एवं कौशल्या अरोड़ा आदि उपस्थित रहे।

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