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स्कूल इंटर्नशिप से गायब शिक्षक, रजिस्टर में लग रही फर्जी हािजरी

3 वर्ष पहले
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डिप्लोमा इन एजुकेशन का कोर्स कर भावी शिक्षक इंटर्नशिप में अपनी ड्यूटी नहीं निभा रहे हैं। निर्देशों के तहत उन्हें स्कूलों में जाकर शिक्षा देनी है। हालात यह हैं कि स्कूलों में भावी शिक्षक पहुंच ही नहीं रहे हैं। फर्जी तौर पर हाजिरी दिखाकर काम चलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका खुलासा शिक्षा विभाग की विशेष टीमों द्वारा स्कूलों में चलाए जा रहे स्कूल इंटर्नशिप प्रोग्राम की जांच के दौरान हुआ है। जिसमें विभिन्न स्कूलों में एक भी विद्यार्थी बच्चों को शिक्षित करता हुआ नहीं मिला, जहां कुछ मिले वे भी बिना आईकार्ड के पाए गए। हालांकि कुछ जगह बेहतर कार्य भी मिला, तो उन्हें शाबासी भी मिली।

जांच अभियान टीम द्वारा इसकी रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। जिसमें राजकीय प्राइमरी विद्यालय महमदपुर, एवं राजकीय प्राइमरी विद्यालय में एक भी विद्यार्थी नहीं मिला, इसके अतिरिक्त राजकीय वशिष्ठ माध्यमिक विद्यालय महमदपुर में कुछ विद्यार्थी मिले तो सोनीपत की धानक बस्ती, राजकीय प्राथमिक पाठशाला, गढ़ी एसएनखां, जटवाडा में भी विद्यार्थी शिक्षित करते हुए मिले। यहां महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी जब उन्हेंं महज अभ्यास के लिए शिक्षण कार्य करना है वे तब भी नहीं आ रहे हैं तो ऐसे में रोजगार मिलने पर वे कैसे अपनी भूमिका के साथ न्याय करेंगे यह बड़ा सवाल है। यह जांच अभियान 19 मई तक चलेगा। शिक्षा विभाग की ओर से इस अभियान के संचालन की जिम्मेदारी मंजू गर्ग, उमेद सिंह कुंडू एवं पुष्पलता को सौंपी गई है।

यह होता है सिस्टम : विभागीय जानकारी के अनुसार डिप्लोमा इन एजुकेशन का कोर्स अब दो साल का होता है, जिसमें विद्यार्थियों को शैक्षणिक अनुभव के लिए स्कूलों में इंटर्नशिप करनी होती है। जिसके तहत उन्हे स्कूलों में छात्रों को पढ़ाने का अनुभव लेना होता है। जिस भी स्कूल में इंटर्नशिप के छात्र शैक्षणिक अनुभव लेते हैं उस स्कूल के मुखिया की हाजिरी के आधार पर कोर्स को संपन्न माना जाता है।

23 कॉलेजों के विद्यार्थियों की लगी है ड्यूटी

सोनीपत में डाइट सहित 23 शिक्षण महाविद्यालय के विद्यार्थियों की ड्यूटी इस समय करीब 146 सेंटरों पर लगाई गई है। उन्हें संबंधित महाविद्यालय अथवा संस्थान के नजदीकी तथा फिर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिक्षण अभ्यास के लिए भेजा गया है।

लेकिन हो रहा है यह : विभागीय सूत्रों के अनुसार कई संस्थानों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी नान अटेडिंग कोर्स पूरा करना चाहते हैं, इसमें कहीं न कहीं संबंधित संस्थान इसमें उनकी सहयोगी भी रहती है इसके एवज में उनसे मनमर्जी की फीस भी वसूली जाती है। चूंकि यह इंटर्नशिप विद्यार्थियों के शिक्षण अभ्यास के लिए होती है, जोकि सही मायनों में हो ही नहीं पाता।

हर गैर हाजिर का नाम भी होगा दर्ज : आदेश जारी हैं कि अब जांच के दौरान सिर्फ गैर हाजिर विद्यार्थियों की संख्या ही नहीं बल्कि उनके नाम भी नोट किए जाए। जिसकी विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाए। ऐसे में उन विद्यार्थियों को कोर्स पूरा करने में दिक्कत होगी जो पहले गैर हाजिर होने के बाद फिर अपनी सैटिंग के जरिए हाजिरी पूरी करते थे।

विभाग की यह एक सराहनीय पहल है। क्योंकि इसके जरिए जहां एक ओर विद्यार्थियों को शिक्षण का अभ्यास मिलता है तो वहीं जांच के दौरान गैर हाजिर विद्यार्थियों की रिपोर्ट के जरिए शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर करने में मिलती है। जांच में यह पाया गया है कि विद्यार्थियों की उपस्थिति काफी कम है। यह उनके करियर में काफी उपयोगी साबित होगा। ’-मंजू गर्ग, संयोजक स्कूल इंटर्नशिप प्रोग्राम, सोनीपत।

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