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पिछले वर्ष टॉप थ्री में रहा सोनीपत इस बार13 में नहीं

3 वर्ष पहले
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लगातार कई सालों से टाप थ्री में रहने वाला सोनीपत जिला एक साल में क्या पढ़ाई के मामले में इतना पिछड़ गया कि पिछले साल में तीसरे स्थान पर रहा सोनीपत इस बार टाप थ्री तो छोड़िए टाप 13 में भी नहीं आ सका। इसे सोनीपत के इतिहास के अभी तक के सबसे खराब परीक्षा परिणाम बताया जा रहा है। इस बेहद खराब परीक्षा परिणाम से न केवल प्राध्यापक बल्कि शिक्षा अधिकारी भी सकते में हैं। जहां एक ओर प्राध्यापकों ने इसे सोनीपत के साथ बड़ी साजिश बताया है तो वहीं शिक्षा अधिकारी का भी मानना है कि इस बार की परीक्षा में सोनीपत में सबसे ज्यादा परीक्षा केन्द्रों पर नजर रही। जिससे विद्यार्थियों ने भय का माहौल बनाया। शनिवार रात को घोषित किए परीक्षा परिणाम महज 63.32 रहा। जबकि पिछले साल यह परिणाम 70.29 प्रतिशत रहा था।

प्राध्यापक ने यह लगाए गंभीर आरोप

प्राध्यापकों के संगठन हसला के जिला प्रधान नरेन्द्र सरोहा ने आरोप लगाया कि सोनीपत को इस बार खास टारगेट पर रखा गया था, हालात ऐसे थे कि मानों फ्लाइंग दस्ते टारगेट सेट कर पहुंचते थे। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा 22 परीक्षा केन्द्र सोनीपत से तोड़े गए। कई केन्द्रों को शिफ्ट किया गया। केन्द्र अधीक्षकों में एफआईआर तक दर्ज हुई। ऐसा किसी अन्य जिले में नहीं हुआ। अब इस मसले को जून में होने वाली राज्य कार्यकारिणी की बैठक में भी उठाया जाएगा।

बेटियों ने बचाई है सोनीपत की लाज

सोनीपत की लाज एक बार फिर बेटियां बचाने में कामयाब हुई हंै। गन्नौर के उदेशीपुर गांव के किसान मनीष की बेटी नैंसी ने 12 वीं में आर्ट संकाय में 500 में से 482 अंक हासिल कर टाॅप पोजिशन हासिल की है। वहीं दूसरी ओर राजकीय स्कूल भटगांव की सरीन ने 500 में से 480 अंक प्राप्त कर जिले में दूसरा स्थान हासिल किया है।

डीईओ बोले सख्ती से बना डर, आगे करेंगे बेहतर प्रयास

डीईओ जिले सिंह शर्मा का भी कहना है कि इस बार कुछ ज्यादा ही सख्ती थी। जिस कारण विद्यार्थियों के दिलों में भय का वातावरण बना। हालांकि इस बार फिर से परिणाम को उठाया जाएगा। हर महीने समीक्षा बैठकों के अलावा स्कूलों में निरीक्षण होंगे, निरंतर रिपोर्ट ली जाएगी। बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं टीचरों को प्रोत्साहित एवं काम से दिल चुराने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

मेधावी बोले दोबारा की जानी चाहिए परीक्षा परिणाम की जांच, यहां के बच्चे इतने कमजोर नहीं हैं

ज्यादा सख्ती से परीक्षा परिणाम प्रभावित होने के आरोप से यह सवाल यहां खड़ा हो रहा है कि क्या नकल के सहारे सोनीपत का परिणाम प्रभावित होता था जो एकाएक इतना गिर गया कि सोनीपत पहले से 14वें नंबर पर पहुंच गया। इसके जवाब में सोनीपत के मेधावी विद्यार्थियों अभिषेक, हैप्पी एवं अंकिता ने कहा कि सोनीपत के विद्यार्थी इतने नकलची नहीं है कि परिणाम इतना गिर जाए। इसकी जांच की जानी चाहिए। दोबारा पेपर जांच किए जाएं

आईएएस बन करूंगी क्षेत्र व माता-पिता का नाम रोशन

नैंसी पुगथला के संत विवेकानंद स्कूल की छात्रा है। दो भाई-बहनों में सबसे बड़ी नैंसी ने बताया कि स्कूल होमवर्क करने के साथ वह घर में 2-3 घंटे तक पढ़ाई करती थी। उसका सपना आईएएस बन कर अपने माता-पिता व क्षेत्र का नाम रोशन करना है। नैंसी के पिता मनीष ने कहा कि वह अपनी बेटी को बेटे की तरह प्यार देने के साथ ही उसकी हर इच्छा पूरी करते है। नैंसी के 482 अंक आने पर उसे अपनी बेटी पर गर्व है। वह जिस भी क्षेत्र में जाना चाहती है उसके लिए वह मेहनत मजदूरी कर उसकी इच्छा को पूरा करेंगे। स्कूल प्रबंधक राजकुमार गुलिया ने बताया कि नैंसी ने स्कूल ही नहीं पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

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