पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज एवं महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर लिंगानुपात बेहतर बनाने के लिए भूमिका निभाएंगे। शुक्रवार को इसके लिए लघु सचिवालय स्थित कांफ्रेंस हाल में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जेंडर सेंसेटाइजेशन विषय पर प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। मुख्य वक्ता के तौर पर नगराधीश जितेन्द्र कुमार ने शिरकत की।
नगराधीश ने कहा कि सामजिक संतुलन के लिए लड़का-लड़की का समान अनुपात होना जरूरी है। इसलिए हमें यह ध्यान रखना होगा कि लड़कों का जितनी संख्या में जन्म हो लड़कियां भी उसी अनुपात में पैदा होनी चाहिए। इसके लिए भ्रूण हत्या करने वालों पर नजर रखनी होगी। साथ ही जन जागरूकता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें लिंगानुपात को बनाए रखने के लिए लोगों को सामाजिक रूप से जागरूक करना होगा। यह बताना होगा कि बेटा-बेटी में कोई अंतर नहीं है। आज बेटियां बेटों से आगे निकल रही हैं। विभिन्न सरकारी विभाग आपसी तालमेल के जरिए लिंगानुपात को बराबर रखने के लिए जागरूक करने का कार्य कर सकते हैं।
डिप्टी सिविल सर्जन डा. आदर्श शर्मा ने जिला सोनीपत में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत सोनीपत जिला में किए गए कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। जिला कार्यक्रम अधिकारी प्रवीण कुमारी ने भी महिलाओं को लिंगानुपात को लेकर जागरूक किया। गुरुग्राम के एनजीओ पोस्को से आई ट्रेनर सीमा मल्होत्रा, ब्लाक की महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी गीता गहलावत के अलावा कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के 100 प्राचार्यों, पुलिस कर्मचारियों व अन्य विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
किस विभाग को क्या जिम्मेदारी
पुलिस विभाग : कन्या भ्रूण हत्या करने वालों और लिंग जांच करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे और उन्हें सजा दिलवाए।
स्वास्थ्य विभाग : यह निगरानी रखे कि कहां-कहां यह अनैतिक कार्य हो रहा है और उन लोगों को सजा कैसे दिलवाई जा सकती है।
शिक्षा विभाग : बेटियों की शिक्षा की जिम्मेदारी गंभीरता से ले और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर दिलाएं।